उन्होंने वर्ष 1987 में कार्यक्रम निदेशक के रूप में एमबीटी-अर्जुन के विकास की समग्र जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने दिनांक 1 दिसंबर 1989 को सीवीआरडीई के निदेशक का पद ग्रहण किया। श्री नटराजन और उनकी टीम के दो दशकों से अधिक समय तक निरंतर कड़ी मेहनत और नवीनतम डिज़ाइन दृष्टिकोण और सर्वोच्च समर्पण के कारण भारत के पास स्वदेशी अत्याधुनिक मुख्य युद्ध टैंक अर्जुन और स्वचालित तोप प्रणाली भीम है।
श्री नटराजन ने एमबीटी अर्जुन की सफलता में अपने व्यक्तिगत योगदान के लिए माननीय रक्षा राज्यमंत्री, श्री मल्लिकार्जुन से वर्ष 1994 में सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार प्राप्त किया। उनकी प्रयोगशाला को वर्ष 1995 की सर्वश्रेष्ठ सिस्टम्स इंजीनियरिंग लैबोरेटरी के रूप में चुना गया, जिसके लिए उन्हें माननीय प्रधानमंत्री से रोलिंग सिलिकॉन ट्रॉफी प्राप्त हुई। उन्हें अपनी असाधारण पेशेवर कुशलता के लिए वर्ष 1996 में इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (भारत) द्वारा राष्ट्रीय डिज़ाइन अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें दिनांक 12 मार्च 1999 से प्रभावी, डीआरडीओ में विशिष्ट वैज्ञानिक का दर्जा दिया गया।
वे जुलाई 2000 से प्रभावी, डीआरडीओ मुख्यालय में सीसी आरएवंडी (एसीई) के रूप में हथियारों, कॉम्बेट वाहनों और इंजीनियरिंग उपकरणों की देखभाल सेवा कर रहे थे। इस अवधि के दौरान, उन्होंने एआरडीई द्वारा विकसित पिनाका एमबीआरएलएस की सेना द्वारा व्यापक मैदानी परीक्षणों द्वारा स्वीकृति सुनिश्चित की।
वे दिसंबर 2001 से प्रभावी, फैलो ऑफ इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग बनें।
उन्हें वर्ष 2003 में कॉम्बेट वाहनों के डिज़ाइन और विकास में उनके योगदान के लिए भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
उन्हें कॉम्बेट वाहनों और एलसीए की मशीनी प्रणालियों के डिज़ाइन और विकास में उनके योगदान के लिए डीआरडीओ द्वारा वर्ष 2003 के लिए तकनीकी नेतृत्व पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उन्हें दिसंबर 2003 से प्रभावी, आईआईटी मद्रास का विशिष्ट स्नातक भी बनाया गया। |