ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
संविधान के लागू होने के साथ-साथ २६ जनवरी १९५० को संविधान की धारा ३४३ के अनुसार हिन्दी भारत संघ की राजभाषा बनी । राष्ट्रपति जी ने सन् १९५२ में कुछ कामों में हिन्दी के इस्तेमाल के लिए आदेश जारी किए । इसके पश्चात राजभाषा अधिनियम १९६३ बना और १९६७ में उसका संशोधन भी हुआ । इस बीच गृह मंत्रालय की ओर से लगातार आदेश जारी होते रहे । गृह मंत्रालय में राजभाषा विभाग बन जाने के बाद राजभाषा नियम १९७६ बने और सभी क्षेत्रों में देश की राजभाषा हिन्दी लागू करने के लिए उत्पन्न हुई भावना के अनुकूल सरकारी कामकाज में हिन्दी का प्रयोग होने लगा है । इसी दौरान रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन में हिन्दी सैल की स्थापना हुई ।
इसके पश्चात राष्ट्रपति जी के आदेशों तथा संसदीय राजभाषा समिति की सिफरिशों के अनुसार संगठन मुख्यालय में राजभाषा निदेशालय की स्थापना की गई ।
वर्तमान में इस निदेशालय में एक पूर्णकालिक निदेशक, एक उप निदेशक, एक सहायक निदेशक(प्रशासन), दो सहायक निदेशक (राजभाषा), तीन वरिष्ठ अनुवादक, चार कनिष्ठ अनुवादक तथा कुछ प्रशासनिक कार्मिक तैनात हैं।
निदेशक का विवरण
नाम : डॉ० महेन्द्र सिंह
दूरभाष : २३००७२३७, २३०१७५६९, फैक्स-२३०१७५७९
पता : डीआरडीओ भवन, कमरा नं० २३७, बी ब्लॉक,द्वितीय तल,राजाजी मार्ग,नई दिल्ली ११००११
प्रोफाइलः डॉ० महेन्द्र सिंह, वैज्ञानिक ''जी'' ने ०१ मार्च, २००६ को राजभाषा तथा संगठन एवं पद्धति का कार्यभार संभाला । इससे पूर्व ०१ दिसंबर १९९९ से २८ फरवरी २००६ तक वे निदेशक, डेसीडॉक के पद पर कार्यरत रहे । इन्होंने १९७३ में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एम एस सी (भौतिकी) तथा १९७५ में पंजाब विश्वविद्यालय से एम एल आई एस सी (प्रलेखन) की डिग्री हासिल की तथा १९९० में प्रलेखन और सूचना विज्ञान में राजस्थान विश्वविद्यालय से पी एच डी की डिग्री प्राप्त की । इन्होंने १९७९ में रक्षा इलैक्ट्रानिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (डी एल आर एल) हैदराबाद में वैज्ञानिक ''सी'' के पद पर तथा १९८३ में आयुध प्रौद्योगिकी संस्थान (आई ए टी) पुणे में कार्यभार ग्रहण किया तथा १९९६ में डेसीडॉक में अपर निदेशक का पदभार संभाला । इलैक्ट्रॉनिक वारफेयर, आयुद्ध और संबद्ध क्षेत्रों में वैज्ञानिकों की सूचना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इन्होंने डी एल आर एल और आई ए टी में आवश्यक अवसंरचना विकसित की। इन्होंने रक्षा वैज्ञानिकों के सूचना तलाशने के तरीके, रक्षा डाटाबेस के योजनाबद्ध विकास की स्थापना करने, एस डी आई सेवाएं और डी आर डी ओ के पुस्तकालयों द्वारा सूचना के स्रोतों का आदान-प्रदान करने से संबंधित विभिन्न अनुसंधान तथा विकास की परियोजनाओं का मार्गदर्शन किया ।
निदेशक, डेसीडॉक के कार्यकाल में इन्होंने डी आर डी ओ वैबसाइट होस्ट करने के लिए अवसंरचना तथा दिल्ली स्थित प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं के लिए द्रोणा मेन रूटिंग सेन्टर सहित डेसीडॉक को आई टी अधारित सूचना केन्द्र के रूप में विकसित किया। इन्होंने मशीनी अनुवाद, प्रलेखों के अंकीकरण की सुविधा का सृजन किया और द्रोणा के मापयम से स्रोतों/डाटाबेसों की उपलब्धता की सुविधा की व्यवस्था की।
डॉ० सिंह को प्रलेखन और परियोजना सहायक गतिविधियों के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डी एल आर एल द्वारा १९८३ में ''सर्टीफिकेट ऑफ मेरिट'' प्रदान किया गया उन्होंने लगभग ३० दस्तावेज, १२ पुस्तकें तथा कुछ अन्य प्रकाशन तैयार किए ।
ई-मेल : m_s_segwal@yahoo.com
कार्य
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मुख्य नियंत्रक अनुसंधान तथा
विकास की अपयक्षता में गठित मुख्यालय की राजभाषा
कार्यान्वयन समिति की सभी बैठकें आयोजित करवाना तथा
उनमें लिए गए निर्णयों को मुख्यालय तथा संगठन की
सभी प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं में लागू करवाना तथा
तत्संबंधी सभी मामलों पर कार्रवाई करना । |
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संसदीय राजभाषा समिति,
केन्द्रीय हिन्दी समिति तथा हिन्दी सलाहकार समिति
सहित सभी उच्च स्तरीय समितियों की सिफारिशों/निर्णयों
को मुख्यालय के सभी निदेशालयों तथा संगठन की सभी
प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं में लागू करवाना । |
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संयुक्त सचिव (प्रशि०) तथा
मु०प्र०अ० की अपचक्षता में गठित रक्षा मंत्रालय की
राजभाषा कार्यान्वयन समिति की र्बठकों संबंधी सभी
मामलों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना । |
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मुख्यालय के सभी निदेशालयों
तथा संगठन की सभी स्थापनाओं/प्रयोगशालाओं से तिमाही
प्रगति रिपोर्ट मंगवाना, उसकी समीक्षा करना तथा
समेकित रिपोर्ट मंत्रालय को भिजवाना । |
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मुख्यालय के सभी निदेशालयों
तथा संगठन की सभी स्थापनाओं/प्रयोगशालाओं में
राजभाषा नीति के कार्यान्वयन संबंधी निरीक्षण करना
तथा उसके दौरान पाई गई कमियों को दूर करवाना । |
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मुख्यालय में हिन्दी पखवाड़ा
मनाना व उसके दौरान आयोजित कार्यक्रमों तथा
प्रतियोगिताओं के लिए समुचित व्यवस्था करना । |
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मुख्यालय में हिन्दी
कार्यशालाएं आयोजित करना । |
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मुख्यालय के सभी निदेशालयों/कार्यालयों
में हिन्दी शिक्षण/प्रशिक्षण की व्यवस्था करना व
उसकी मानीटरिंग करना । |
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डीआरडीओ की वैज्ञानिक एवं
तकनीकी विषयों पर मूल हिन्दी पुस्तक लेखन पुरस्कार
योजना से संबंधी सभी मामलों पर कार्रवाई करना । |
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डीआरडीओ मुख्यालय तथा संगठन
की सभी स्थापनाओं/प्रयोगशालाओं हेतु अपेक्षित
हिन्दी पदों का सृजन करवाना । |
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मुख्यालय के सभी निदेशालयों
तथा संगठन की सभी स्थापनाओं/प्रयोगशाओं से वार्षिक
मूल्यांकन रिपोर्ट मंगवना तथा समेकित रिपोर्ट
तैयार करके मंत्रालय को भिजवाना । |
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संगठन की सभी प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं
में राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए बजट व्यवस्था
करना । |
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इन सभी प्रयोगशालाओं के
कॉरपोरेट रिव्यू के लिए राजभाषा नीति संबंधी सभी
मामलों पर कार्रवाई करना। |
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केन्द्रीय/राज्य सरकारों के
मंत्रियों तथा संसद सदस्यों व अन्य महत्वपूर्ण
व्यक्तियों/उच्चाधिकारियों से प्राप्त पत्रों के
उत्तर के मसौदे व संसद में पेश किए जाने वाले
दस्तावेजों को हिन्दी में तैयार करना अथवा उनका
अपेक्षित भाषा में (हिन्दी अथवा अंग्रेजी
में)अनुवाद करना । |
ओ एण्ड एम के कार्य
संगठन एवं पद्धति अपययन
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संरचना तथा प्रक्रिया का
पुर्नगठन या युक्तिकरण |
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सूचना प्रणाली |
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विकास, प्रभावकारी प्रलेखन |
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रिकॉर्ड प्रबंधन |
कार्य
मापन
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पदों के सृजन संबंधी
प्रस्तावों की संवीक्षा करना |
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स्टाफ निरीक्षण यूनिटों की
सहायता करना |
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आउटपुट प्रतिमान तैयार करना
तथा उनकी समीक्षा करना |
विलंब
रोकने के लिए
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विभिन्न बकाया विवरणियों की
संवीक्षा करना |
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जांच करके संबंधित ओंधकारियों
को उचित नोटिस देना |
निरीक्षण
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निरीक्षण कार्यक्रम तैयार
करना |
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आकस्मिक जांच/निरीक्षण के
लिए रोस्टर तैयार करना |
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सुनिश्चित कार्यान्वयन |
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उचित समाधान सुझाना |
*वर्तमान में ओ एण्ड एम में
कोई स्टाफ तैनात न होने के कारण सभी कार्रवाइयां
स्थगित हैं ।
उपलब्धियां
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राजभाषा नियम १९७६ के अनुसार
यह निदेशालय जारी किए गए आदेशों को संगठन मुख्यालय
तथा इसके अधीनस्थ प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं/कार्यालयों
में राजभाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं
कार्यान्वयन का कार्य करता आ रहा है । इस निदेशालय
का उद्देश्य यही रहा है कि डी आर डी ओ वार्षिक
कार्यक्रम में दिए लक्ष्यों को प्राप्त करे । इसके
अन्तर्गत सर्वप्रथम संगठन मुख्यालय में कार्यरत
८०% ओंधकारियों/कर्मचारियों को हिन्दी का
कार्यसाधक ज्ञान देकर सन् १९७९ में डी आर डी ओ को
ओंधसूचित करवाया गया । |
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मुख्यालय के अन्तर्गत लगभग
७० प्रयोगशालाएं/स्थापनाएं/यूनिटें/आरसीएमए/केन्द्र
आदि आते हैं संगठन मुख्यालय जिनके राजभाषा के
कामकाज की मॉनीटरिंग करता है एवं सहायता करता आ रहा
है । |
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परिणामस्वरूप आज हमारे सारे
कार्यालय राजभाषा हिन्दी के प्रति पूर्ण रूप से
जागरुक हो चुके हैं । |
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राजभाषा निदेशालय के प्रयासों
से डी आर डी ओ के अन्तर्गत आने वाली लगभग ५० बड़ी
प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं में से २८ प्रयोगशालाओं तथा
स्थापनाओं के ८०% ओंधकारियों/कर्मचारियों को हिन्दी
का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त करवाकर इन्हें
ओंधसूचित करवा दिया गया है । |
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संसदीय राजभाषा समिति द्वारा
प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं के किए जाने वाले निरीक्षण
में संगठन मुख्यालय हरसंभव सहायता करता रहा है । |
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राजभाषा निदेशालय ने २७-२८
अप्रैल १९९५ को डी आर डी ओ की सभी प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं
की राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अपयक्षों का
प्रथम सम्मेलन ए डी आर डी, ई आगरा में सफलतापूर्वक
आयोजित किया गया । |
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डी आर डी ओ की सभी
प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं के राजभाषा ओंधकारियों का
१३ अगस्त १९९९ को दिल्ली (मेटकाफ हाउस) में
वार्षिक राजभाषा कार्यान्वयन सम्मेलन का सफल आयोजन
किया गया था । |
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यह निदेशालय विज्ञान के
क्षेत्र में हिन्दी लेखन को प्रोत्साहित करने के
लिए वर्ष ९५-९६ से नियमित रूप से पुस्तक पुरस्कार
योजना चला रहा है । इसमें भारत के सभी नागरिक भाग
ले सकते हैं। |
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इस योजना के अन्तर्गत
विज्ञान के क्षेत्र में हिन्दी लेखन के लिए भारत
के विभिन्न क्षेत्रों के लेखकों तथा डी आर डी ओ के
लेखकों को भी नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जा
चुका है। पहले यह राशि ८० हजार रुपए थी जिसे
२००५-०६ से बढ़ाकर एक लाख साठ हजार रुपए कर दिया गया
है । |
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संगठन मुख्यालय द्वारा पहली
बार वर्ष २००५-२००६ में गृह पत्रिका का प्रकाशन
किया गया । इस पत्रिका का नाम रक्षा अनुसंधान भारती
है । इस पत्रिका का विमोचन रक्षा उत्पादन राज्य
मंत्री के कर-कमलों द्वारा ०९.११.२००६ को हिन्दी
सलाहकार समिति की बैठक में किया गया । |
राजभाषा निदेशालय डी आर डी ओ
की प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं के लिए क्षेत्रीय सम्मेलन
आयोजित करता रहा है । डी आर डी ओ की सभी प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं
को पिछले कई वर्र्षों से प्रतिवर्ष राजभाषा के व्यापक
प्रचार-प्रसार के लिए तथा राजभाषा आदेशों व नीतियों के
अनुपालन के लिए बजट उपलब्ध कराता रहा है । स्थापना से
लेकर अब तक यह निदेशालय अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा
के सुचारू कार्यान्वयन में सहायता तथा मॉनीटरिंग करता
रहा है तथा संपर्क/सहायता ओंभयान के तहद राजभाषा के
व्यापक प्रचार प्रसार को प्रोत्साहित करता रहा है ।
वर्तमान गतिविधियां
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संगठन मुख्यालय में सभी
प्रकार के अनुवाद कार्य करना |
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कार्यालयापयक्ष के
आदेशानुसार राजभाषा के कार्यान्वयन में सहायता करना |
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संसदीय राजभाषा समिति का
निरीक्षण, रक्षा मंत्रालय द्वारा किये जानेवाले
संयुक्त निरीक्षण तथा मुख्यालय निरीक्षण से
संबंधित सभी कार्रवाइयां करना
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हिन्दी सलाहकार समिति की
बैठक में कार्यालयापयक्ष की सहायता करना |
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मुख्यालय द्वारा अगली गृह
पत्रिका के प्रकाशन की तैयारी
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(क)
प्रयोगशालाओं से संपर्क
राजभाषा निदेशालय सभी प्रयोगशलाओं/स्थापनाओं से नियमित
रूप से संपर्क बनाए रखता है । प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं
से प्राप्त तिमाही प्रगति रिपोर्ट, वार्षिक मूल्यांकन
रिपोर्ट की समीक्षा कर कार्यान्वयन संबंधी आवश्यक
निदेश एवं सहायता उपलब्ध कराता है । राजभाषा नियमों के
सुचारू कार्यान्वयन के लिए इनकी हरसंभव सहायता करता है
।
(ख)
सेनाओं से
संपर्क
इस निदेशालय द्वारा इस प्रकार का कोई काम नहीं किया
जाता जिसमें सेनाओं से संपर्क करने की आवश्यकता पड़े ।
उद्योगों से संपर्क
इस निदेशालय को उद्योगों से किसी संपर्क की आवश्यकता
नहीं होती ।
निदेशालय के अन्तर्गत आने वाली
प्रयोगशालाएं
कॉरपोरेट निदेशालय होने के नाते डी आर डी ओ की सभी
प्रयोगशालाएं/स्थापनाएं/ केन्द्र/कार्यालय राजभाषा
कार्यान्वयन के संबंध में इसके अंतर्गत आते हैं ।
दी गई/उपलब्ध कराई गई सेवाएं
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सेवाएं/सहायता
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की
पर्सोनल |
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मुख्यालय संबंधी राजभाषा
कार्य |
श्री राजेन्द्र प्रसाद, उप
निदेशक |
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क,ख तथा ग क्षेत्र से
संबंधित कार्य |
श्रीमती अरूणा कुलकर्णी,
सहा निदे(राभा) |
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प्रशासनिक कार्य |
श्री रमेश चन्द्र, सहायक
निदेशक |
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यदि किसी कारणवश उपरोक्त
सभी कार्र्यों में उचित सहायता नहीं मिल पाती है
तो निदेशक राजभाषा से संपर्क किया जा सकता है ।
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निदेशक |
डॉ०
महेन्द्र सिंह |
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उपनिदेशक |
श्री राजेन्द्र प्रसाद |
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सहायक निदेशक |
श्री रमेश चन्द्र |
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श्रीमती अरूणा कुलकर्णी
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वरिष्ठ अनुवादक
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श्री आर एस शर्मा |
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श्रीमती विनीता पोखरियाल |
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श्री सुजीत कुमार मेहता |
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कनिष्ठ अनुवादक |
श्री शिव सहाय चतुर्वेदी |
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श्रीमती सुषमा धीमान |
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श्री जगदीश मर्तोलिया |
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श्री सहदेव सिंह |
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सहायक |
श्री थंगजलम गुइटे |
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व्यैक्तिक सहायक |
श्री गुलजारी लाल |
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आशुलिपिक |
मो० शमीम अहमद |
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अवर श्रेणी लिपिक |
श्रीमती नीरा |
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
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श्री बाबू लाल
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श्री टी एस रावत |
निदेशालय की प्रशंसा
रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन ने वर्ष १९८८-८९ में
सरकारी काम काज में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करके
राजभाषा चल वैजयंती प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान
प्राप्त किया तथा प्रशस्ति पत्र प्राप्त किया ।
डी आर डी ओ द्वारा प्रकाशित गृह पत्रिका रक्षा
अनुसंधान भारती का दिनांक ०९-११-०६ को आयोजित हिन्दी
सलाहकार समिति की बैठक में रक्षा उत्पादन राज्य मंत्री
के कर कमलों द्वारा विमोचन करवाया गया ।
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