संक्षिप्त इतिहास
सरकारी विभाग होने के कारण डीआरडीओ, सरकार पुनरावलोकन प्रणाली जैसे संसद, रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति, परामर्श दात्री समिति, लोक लेखा समिति और रक्षा मंत्रालय में कार्य कर रही अन्य समितियों के प्रति जबावदेह है। जहां तक डीआरडीओ का संबंध है इसका नोडल प्वाइंट योजना एवं सलाहकार निदेशालय है। इस भूमिका में निदेशालय को इन संस्थाओं द्वारा उठाए गए प्रश्नों का जवाब देने के लिए विवरण पत्र तैयार करना होता है, इसके अतिरिक्त इन समितियों की बैठकों के आयोजन के लिए निदेशालयं द्वारा विवरण पत्र प्रस्तुति सामग्री और कार्यकृत भी तैयार किए जाते हैं।
योजना और समन्वय निदेशालय (डीपी एंड सी) डीआरडीओ मुख्यालय, नई दिल्ली के सम्मिलित निदेशालयों में से एक है। निदेशालय के जबावदेही से संबंधित तीन प्राथमिक क्षेत्र हैं - संसद संबंधी कार्य, परियोजना प्रबंधन, और सभी प्रकार के समन्वयात्मक कार्यकलाप।
संसद संबंधी कार्य: योजना एवं समन्वय निदेशालय संगठन और इसके बाहर के सभी सरकारी कार्यालयों के बीच संबंध स्थापित करता है। इस प्रक्रिया में, यह संसदीय प्रश्नों के लिए उत्तर तैयार करता है, रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति से संबंधित सभी कार्यों के अर्थात बैठकों के आयोजन, विवरण प्रत्रों को तैयार करना, प्रस्तुति सामग्री तैयार करना, दौरे आयोजित करना इत्यादि करता है। निदेशालय स्थायी समिति के कार्यों की तरह रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली परामर्शदात्री समिति से संबंधित मुद्दों की जवाबदेही भी संभालता है।
परियोजना प्रबंधन कार्य: डीआरडीओ परियोजना आधार पर अधिकांश समयबद्ध कार्यों को करता है। डीआरडीओ की 50 प्रयोगशालाओं द्वारा शुरु की जाने वाली परियोजनाओं की सामुदिक प्रयोगशालाओं द्वारा तैयार परियोजनाओं जिन्हें उनके तकनीकी निदेशालयों द्वारा डीआरडीओ मुख्यालय पर अग्रसरित किया जाता है, के आधार पर इस निदेशालय द्वारा तैयार किया जाता है। पंचवर्षीय योजना तैयार की जाती है और रक्षा मंत्रालय को अग्रसरित की जाती है। अनुमति होने पर सूचीबद्ध परियोजनाओं की निगरानी निगमित समीक्षा के दौरान निदेशालय के मुख्य नियंत्रक और ऱक्षा अनुसंधान समिति द्वारा की जाती है। ये समीक्षा अधिक समय और लागत से बचने के इरादे से की जाती है तथा तकनीकी प्रगति समीक्षा और अनुसूचित समीक्षा के आधार पर प्रयोगशालाओं को जल्दी समाप्त करने या समय विस्तार की सलाह देता है। इस तरह से निदेशालय समय और लागत कम करने की दृष्टि से, जिसके कारण प्रबंधन के पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है यह सुनिश्चित करना निदेशालय का कार्य है कि जिन विलम्बों और लागत पुनरीक्षण से बचा जा सकता है, उनसे वास्तव में बचा गया है। डीआरडीओ परियोजनाएं में पिछले कुछ समय से हानि हुई है।
समन्वयक कार्य: योजना और समन्वय निदेशालय सहयोगात्मक प्रकृति के अनेक विषयों के संबंध में बाहरी संसार के लिए डीआरडीओ की खिड़की है। शोध कार्य करने के लिए अथवा डीआरडीओ के साथ तकनीकी मामलों पर संपर्क करने के लिए, बाहरी एजेंसियां सीधे तौर पर संबंधित तकनीकी समूह के पास जा सकती हैं यदि उन्हे गंतव्य मालूम हैं; अन्यथा योजना और समन्वय निदेशालय ऐसी बैठकों को संभव करता है। रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग और डीआरडीओ, से संबंधित अन्य सभी दूसरे मामलो के लिए, योजना और समन्वय निदेशालय कार्यों को समान्वित करता है। और समुचित उत्रर भेजता है। योजना और समन्वय निदेशालय विभिन्न नियमित प्रतिस्पर्धाओं के आयोजन में सहायता करता है जैसे डीआरडीओ की गणतंत्र दिवस परेड में भागीदारी, निगमित समीक्षा और रक्षा अनुसंधान परिषद की समीक्षा कार्यक्रम निर्धारित करना और निगमित संशाधन निदेशालयों की नीतियों पर प्रयोगशाला निदेशक को अपडेट करने के लिए वार्षिक संसाधन सभा का आयोजन करना। सूची बहुत लंबी और कभी न समाप्त होने वाली हो सकती है क्योंकि नए से नए मामले समय समय पर आते रहते हैं। एक बार समन्वय संपर्क स्थापित होने पर, योजना और समन्वय का निदेशालय पृष्टभूमि में लौट जाता है, लेकिन यदि कोई स्थिति आती है तो निदेशालय वह कार्य करने के लिए मौजूद रहता है।
इसके अतिरिक्त, संस्थान के अंतर्गत अनेक ऐसी घटनाएं हैं जहां योजना और समन्वय निदेशालय नीतियों को बनाता है उनका कार्यन्वन सुनिश्चत करता है, और निर्णयों का प्रसार करता है। निगमित क्रियाप्रणाली के लिए प्रयोगशालाओं की समीक्षा करना, और अनुसंधान निष्पादन के लिए प्रयोगशालाओं की समीक्षा करना इस श्रेणी में आते हैं। और अंत में, योजना और समन्वय निदेशालय अनेक प्रकार की प्रकीर्वतात और अज्ञात अन्य क्रियाएं करता है।
संपर्क पता:
निदेशक,
योजना और संमन्वय निदेशालय
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन
रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग
रक्षा मंत्रालय
ए125, डीआरडीओ भवन, राजाजी मार्ग
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