नौसैनिक अनुसंधान एवं विकास निदेशालय का गठन 1972 में नौसैन्य विज्ञान और प्रोद्योदिकी निदेशालय के रूप में किया गया था बाद में उसका नाम बदल कर उसे मौजूदा नाम दिया गया उसके बाद क्रमश: 1983 और 1984 में उसमें एनएसटीएल और एनपीओएल के परियोजना प्रकोष्ठ शामिल किये गये।
डीएनआरडी डीओआरडी की नौसैनिक शोध प्रयोगशालाओं और उपभोक्ताओं, यानी भारतीय नौ सेना, रक्षा उत्पादन एजेंसियों और अकादमीय संस्थानों समेत दूसरी बाहरी एजेंसियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह निदेशालय उत्पादन एजेंसियों की मार्फत डीआरडीओ की नौसैनिक शोध प्रयोगशाओं में विकसित तकनीकी को नौसेना के हवाले कराने में सहायता करता है।
डीएनआरडी डीआरडीओ मुख्यालय का ऐसा तकनीकी निदेशालय है जो एनपीओएल, एनएसटीएल और एनएमारएल, तीन प्रयोगशालाओं का नियंत्रण करता है। यह प्रयोगशालाओं का नियंत्रण करता है। ये प्रयोगशालाएं विशुद्ध रूप से नौसेना संबंधी विकास कार्य करती हैं।
निदेशालय नौसैनिक प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में मौलिक शोध को प्रोत्साहन और समर्थन देने के लिए गठित नौसैन्य शोध परिषद (एनआरबी) का सदस्य सचिव भी है। |