प्रक्षेपास्त्र विकास के कामकाज पर स्वतंत्र रूप से नजर रखने के लिए 1972 में प्रक्षेपास्त्र निदेशालय का गठन किया गया था। निदेशालय को प्रक्षेपास्त्र विकास और डीआरडीएल, आरसीआई और आईटीआर के मुख्यालयों के गठन का काम सौंपा गया है।
निदेशालय डीआरडीओ की तमाम प्रयोगशालाओं को आईएसओ 9000 प्रमाणपत्र हासिल करने में मदद के लिए डीआरडीएल, आरसीआई, सीपीडीसी, आईटीआर, क्यूएआरसी से संबंधित कामकाज का समायोजन करता है। इसके अलावा वह डीआरडीओ की कुछ प्रयोगशालाओं में नागरिक उपयोग के लिए विकसित प्रोद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए सीआईआई और दूसरे उद्योगों का संबंधित कार्यों में हाथ बंटाता है। |
पहला समूह: भारतीय सशस्त्र बलों, यानी स्थल सेना, वायु सेना और नौ सेना की प्रक्षेपास्त्र संवर्धन परियोजनाओं और डीआरडीएल और आरसीआई की गतिविधियों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है।
दूसरा समूह: प्रक्षेपास्त्र परास से संबंधित गतिविधियों और शोध संवर्धन परियोजनाओं और डीआरडीएल और आरसीएल की गतिविधियों का समायोजन करता है।
तीसरा समूह: गुणवत्ता आश्वस्ति और विश्वसनीयता प्रकोष्ठ (क्वालिटी अश्योरेंस एंड रिलायबिलिटी सेल) डीआरडीओ की तमाम प्रयोगशालाओं के आईएसओ 9000 प्रमाणपत्र हासिल करने से संबंधित गतिविधियों और शोध संवर्धन परियोजनाओं का समायोजन करता है।
चौथा समूह: डीआरडीओ-सीआईआई अंतर्क्रिया समूह नागरिक उपयोग के लिए डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं में विकसित प्रोद्योगिकियों के हस्तांतरण से संबंधित गतिविधियों का समायोजन करता है। |