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डा. सुदर्शन कुमार को सामग्री निदेशक नियुक्त किया गया है। उन्होंने 1980 में जम्मू विश्वविद्यालय से नाभिकीय भौतिकी में पीएचडी की उपाधि हासिल की और 1983 में डीआरडीओ से जुड़े। इस बीच उन्होंने जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला में सालिड स्टेट न्यूक्लियर ट्रैक डिटेक्टर (एसएसएनडीटी) सुविधा स्थापित की और सालिड स्टेट न्यूक्लियर ट्रैक डिटेक्टर का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करके नाभिकीय रक्षा, रेडियोधर्मिता के प्रबंधन और डाटाबैंक बेस के सृजन और प्राकृतिक पर्यावरण में विकिरणों और रेडियोधर्मिता मापन उपायों के विकास पर काम किया। उन्होंने 140 शोध पत्र छपाये हैं और चार उत्पाद विकसित किये हैं। परियोजना संयोजक की हैसियत से उन्होंने डीआरडीओ की अपने हाथ में ली हुई एक बड़ी जीएस क्यूआर परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया जिसमें डीएलजे नोडल एजेंसी थी और पांच प्रयोगशालाएं, वीआरडीई, आर-एन-डीई (इंजीनियर्स), सीएआईआर, डीआरडीई और एचईएमआरएल शामिल थीं। इस परियोजना के तहत बीएमपी द्वितीय पर आधारित एनबीसी रेसी वाहन विकसित हुए और विभिन्न चरणों में हुए उपभोक्ता परिक्षणों की कसौटियों पर खरे उतरे थे। इस यान को सैन्य सेना में शामिल करने के लिए स्वीकार कर लिया गया है और फिलहाल इसका जीएस मूल्यांकन चल रहा है। उन्होंने पर्यावरणीय मैट्रिक्स और भूमिगत शरणस्थलों के समग्र पैनलों में रेडियोधर्मिता मापने के लिए चल नाभिकीय क्षेत्र प्रयोगशाला भी विकसित की है। उन्होंने 1991 में ठोसों में कणिका प्रवाह पथ निर्धारण (पार्टिकल्स ट्रैक्स इन सालिड) विषय पर सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया और उसकी कार्रवाइयों की विवरणिका का संपादन किया। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के अनुमोदित शोध निदेशक की हैसियत से उन्होंने डीआरडीओ के दो वैज्ञानिक और एक जेआरएफ को पीएचडी के लिए उनके शोधकार्य में मार्गदर्शन किया।
'खतरे के प्रत्यक्षबोध की स्थिति में पर्यावरण निगरानी की चुनौतियां' विषय पर उनके वाग्मितापूर्ण व्याक्यान के लिए उन्हें एसए-टू-आरएम ने प्रशंसापत्र प्रदान किये और 1997 और 1998 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र के पदक मिले और 2003 में एनबीसी रेसी वेहिकल के विकास के लिए उन्हें विकास पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
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