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- निदेशालय सुविधाओं की स्वीकृति के सूत्र तय करता है और जैव विज्ञान प्रयोगशालाओं की पंचवर्षीय शोध परियोजनाओं पर नजर रखता है।
- भारतीय स्थल, जल और वायु सेनाओं को तैयारशुदा भोजन और उत्तरजीवीय और सांग्रामिक रसद की आपूर्ति को सुलभ बनाता है।
- भारतीय रक्षा प्रोद्योगिकी जैव विज्ञान समूह की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित प्रोद्योगिकी के बारे में व्यापक स्तर पर जानकारी पैद करता है और सांगठनिक सीमाओं से परे जाकर वैज्ञनिकों-प्रोद्योगिकीविदों के बीच अन्योन्य क्रिया को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रोद्योगिकी को प्रोत्साहन देता है।
- अंतर प्रतिष्ठानिक जुड़ाव और सहयोग को मजबूती प्रदान करता है जिससे डीआरडीओ-आईसीएआर अंतराफलक का निर्माण हुआ। रेडियोधर्मी औषधियों पर डीआरडीओ-बीएआरसी के बीच सहयोग और टेरी, डीबीटी एंड डीएसटी और दूसरे अकादमीय प्रतिष्ठानों और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग स्थापित हो सका।
- कार्यकी, जैवचिकित्सकीय अनुप्रयोगों, रेडियोधर्मी रोग प्रतिरोधात्मक चिकित्सा, जैव प्रोद्योगिकी वगैरह के विभिन्न पहलुओं पर रूस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, क्यूबा, इटली वगैरह के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुगम बनाना।
- नई परियोजनाओं के प्रस्तावों की पूर्व समीक्षा कराना और विशेषज्ञ परियोजना कमेटी की बैठकें आयोजित कराना।
- निदेशालय के अधीन काम करने वाली प्रयोगशालाओं की विभिन्न गतिविधियों के परिप्रेक्ष्य में उपभोक्ताओं और अकादमीय संस्थानों और उद्योगों के विशेषज्ञों की अन्योन्य क्रियात्मक बैठकों का आयोजन करना।
- जैव विज्ञान के क्षेत्र में अंतर-शाखीय शोध को बढ़ावा देने के लिए डीआरडीओ-भरथिअर विश्वविद्यालय केंद्र की स्थापना को सुगम बनाना।
- ज्ञान के प्राकृतिक साधनों जैव विज्ञान शोध परिषद के तत्वाधान में जानकारियों, अनुभवों, सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ और उसका इस्तेमाल करके देश में जैवविज्ञानों की जानकारियों का आधार बढ़ाना।
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