चरम प्राक्षेपिकी अनुसंधान प्रयोगशाला (च.प्रा.अ.प्र.) की स्थापना रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन के अंतर्गत एक आधुनिक आयुध अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में सन 1961 में हुई। प्रयोगशाला ने सन् 1967 में पूरी तरह से काम करना शुरु किया और तत्कालीन रक्षा मंत्री ने जनवरी 1968 में इसका औपचारिक उदघाटन किया। मुख्य प्रयोगशाला चण्डीगढ़ में स्थित है जबकि फायरिंग रेंज चण्डीगढ़ से 22 कि.मी दूर हरियाणा में रामगढ़ में स्थित है जो 5000 एकड़ क्षेत्रफल में फैली हुई है। पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से यह प्रयोगशाला उत्कृष्ट संस्थान के रुप में उभरी है और डी.आर.डी.ओ. में आयुध अध्ययन के क्षेत्र में प्रमुख तकनीकि आधारों में से एक बन गई है।
इस प्रयोगशाला में उच्च विस्फोटकों, अधिस्फोटकों तथा प्रघाती तरंगों के क्षेत्र में नये आयुधों के लिये आंकडें तथा डिजाइन पैरामीटर विकसित करते हुए और स्वदेशी तथा विदेशी मूल के आयुधों के चरम प्रभावों का आकलन करते हुए मूल तथा अनुप्रयुक्त अनुसंधान की सुविधा उपलब्ध है।