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डॉ0 रत्नाकर नारायण सर्वदे, वैज्ञानिक-जी, निदेशक महोदय, ने सन् 1972 में नागपुर के वी.आर.सी.ई. से मैकनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और सन् 1974 में वारंगल के आर.ई.सी. से डिज़ाइन तथा उत्पादन इंजीनियरिंग में स्नाकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत अपने जीवन की शुरुआत की। इसके उपरांत इन्होंने पौलेंड में गिलवाइस के सिलेसियन कनीकी विश्वविद्यालय से टाटा मोटर की महेन्द्रा एंड महेन्द्रा कंपनी में कार्य प्रारंभ किया और इसके साथ-साथ पौलेंड के वारशाह तकनीकी विश्वविद्यालय से इलैक्ट्रो केमिकल मशीनिंग में अनुसंधान कार्य के लिए डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की। इन्होंने सन् 1985 में रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन में आने से पूर्व आई.आई.टी. मुंबई में कार्य किया। ये लोनावाला के शिवाजी वायुसेना इंजीनियरिंग कॉलेज संकाय में सदस्य भी रहे। इन्होंने रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार एवं जी-फास्ट के गौरवशाली विशेषज्ञों की समिति से संपर्क करने के |
| उपरांत,रक्षा विकास परियोजनाओं में शीत-क्षेत्र में इंजीनियरिंग सैन्य-पुलों अस्त्र प्रक्षेपणप्रक्षेपणास्त्र इत्यादि में अनुसंधान तथा विकास संस्थान (इंजीनियर), पूणे की प्रयोगशाला में उल्लेखनीय कार्य किया। ये वर्ष 1995-96 में अंटार्कटिका के पंद्रवे भारतीय वैज्ञानिक अभियान दल के सदस्य भी रहे। इनकी अभिरुचि शीत क्षेत्र इंजीनियरिंग, रिलायबिल्टी इंजीनियरिंग, उत्पाद इंजीनियरिंग तथा पर्वतीय युध्द क्षेत्र के कार्यों में है। |
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