उनकी अभिरुचि के क्षेत्रों में बीजगणित, कूटलिपि, फॅजी तर्क, कृत्रिम न्यूरॉल नेटवर्क तथा भाषण प्रौद्योगिकी हैं । इन्होंने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं तथा सम्मेलनों में लगभग 50 लेख प्रकाशित किए हैं । इन्होंने मूलभूत अनुसंधान और कुछ महत्वपूर्ण अनुसंधान व विकास परियोजानाओं का नेतृत्व भी किया है । इन्होंने बहुत सी बीई और एमई परियोजनाओं का मार्गदर्शन भी किया है । इन्होंने वर्ष 1997 के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय और आईआईटीडी में पंजीकृत कुछ वैज्ञानिकों के पीएचडी कार्यों की देखरेख भी की है ।
फॅजी तर्क के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इन्हें प्रशस्ति पत्र दिया गया है । हिन्दी में लिखी गई कूटलिपि पर उनकी पुस्तक को वर्ष 1997 में डीआरडीओ ने प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया है । |