प्रूफ एवं प्रयोगात्मक संगठन ने मई 1895 में भारत में प्रूफ विभाग के रूप में कार्य करना आरंभ किया । बालासोर में इसका मुख्यालय बनाया गया । तथापि कैप्टन आरएच मोहन की कमान में मार्च 1894 को पहली बार 12 पीडीआर के शार्पनेल गोलों की 12 बार बमबारी की गई । कैप्टन आरएच मोहन की सिफारिशों के कारण ही इस संगठन की मंजूरी संभव हो सकी । अपने 109 साल के अस्तित्व में इस संगठन का नाम प्रूफ एवं प्रयोगात्मक विभाग रखा गया जिसे बाद में बदलकर प्रूफ एवं प्रयोगात्मक संगठन कर दिया गया ।  
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