मुख्य पृष्ठ पीएक्सई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
     
       
     
 

प्रूफ एवं प्रयोगात्मक संगठन ने मई 1895 में भारत में प्रूफ विभाग के रूप में कार्य करना आरंभ किया । बालासोर में इसका मुख्यालय बनाया गया । तथापि कैप्टन आरएच मोहन की कमान में मार्च 1894 को पहली बार 12 पीडीआर के शार्पनेल गोलों की 12 बार बमबारी की गई । कैप्टन आरएच मोहन की सिफारिशों के कारण ही इस संगठन की मंजूरी संभव हो सकी । अपने 109 साल के अस्तित्व में इस संगठन का नाम प्रूफ एवं प्रयोगात्मक विभाग रखा गया जिसे बाद में बदलकर प्रूफ एवं प्रयोगात्मक संगठन कर दिया गया । इस संगठन के मुख्यालय की कमान डायरेक्टर जनरल-आर्डनेन्स (डीजीओ), भारत को सैंप गई । बाद में इस कमान की बागडोर डीजीओ के अधीन निरीक्षण संगठन को सौंप दी गई । आरंभ में इसके पास 15 एकड़ भूमि थी । वर्ष 1949 में जब इसकी रेंज बढ़ाई गई तो भूमि की सीमा को बढ़ाकर 685 एकड़ कर दिया गया । समय के साथ-साथ और वर्ष – दर – वर्ष बदलती भूमिका के कारण इस संगठन का आकार भी बड़ा हो गया है । स्वतंत्रता के बाद डीआरडीओ के प्रशासनिक नियंत्रण में आने से पूर्व, पीएक्सई 1958 तक महानिदेशक के नियंत्रणाधीन रही । वर्तमान समय में संगठन की अधिसूचित रेंज की लंबाई समुद्र तट के किनारे और समुद्र के अंदर क्रमशः 50,50 किलोमीटर हो गई है ।

 
 
         
 
 
   
 
 
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