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एकीकृत गुप्त प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के परियोजना निदेशक के रुप में उन्होनें अनेक गोपनीय हार्डवेयरों का डिजाइन तैयार, विकसित, परीक्षण किया और सेवा में उन्हें शामिल किया। इनमें से कुछ चीजों की नौसेना के पहली श्रेणी के गुप्त जहाज में शामिल किया गया। उन्होनें सेवा में शामिल अनेक प्रणालियों के डिजाइन और विकास में प्रमुख भूमिका निभाई जैसे मशीनरी रूम नियंत्रण सिमुलेटर, दोलन अन्वीक्षण प्रणाली, कार्बन डाईआक्साइड अन्वीक्षण प्रणालियां/पंडुबियां, स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणालियां, एकीकृत क्षति नियंत्रण और निगरानी प्रणालियां इत्यादि। वे निम्नलिखित सुविधाओं को स्थापित करने में भी जिम्मदार थे
- कंपन, शोर और दोलन केंद्र
- गोवा में जल के भीतर ध्वनिक और चुम्बकीय क्षेत्र परिसर
- डोल्फिन हिल में सहायक रडार परिसर
- विजाग तट में भारी ड्यूटी कंपन बार्ज सुविधा
- एनएसटीएल में ध्वनिक परीक्षण केंद्र
- विराग में ईएलएफई माप रेंज
वह संगणात्मक सॉफ्टवेयर जैसे फाउंडेशनों के लिए ढांचागत विकास के विस्तारण और एटीवीपी के लिए मशीनरी के विकास/कार्यानव्यन के लिए भी जिम्मेदार थे।
- जहाजों और पनडुबियों के चुम्बकीय और विद्युतीय संकेतों की संगणना
- जहाजों और पनडुबियों के ध्वनिक संकेत की संगणना
- जहाज, लक्ष्य, प्रक्षेपक इत्यादि के रडार संकेत की संगणना
- जहाज और पनडुबी के आईआर संकेत की संगणना
उन्हें अनेक महत्वपूर्ण पुरस्कार भी प्राप्त हुए जिनमें 17 मई, 2005 को प्रधानमंत्री से आत्मनिर्भरता में उत्कृष्टता के लिए अग्नि पुरस्कार, प्रधानमंत्री से 11 जनवरी, 1996 को प्राप्त 1993 वर्ष का वैज्ञानिक पुरस्कार शामिल है। 1999 में भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरी अकादमी के अध्येता चुने गए (एफएमएई), रक्षा मंत्री से जुलाई, 1992 में डीआरडीओ प्रौद्योगिकी पुरस्कार प्राप्त किया, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2000, में रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार से प्रशास्ति पत्र प्राप्त किया। सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी पत्र के लिए कोमोडोर गर्ग स्मारक व्याख्यान पुरस्कार (1991), इंजीनियरिंग ध्वनिशास्त्र में योगदान में एकोस्टिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका से एनएएल बंगलौर में 14 दिसंबर, 2005 के रजत पदक प्राप्त किया। वह 2003-2004 और 2004-2005 के दौरान फ्लोरिडा स्टेट विश्वविद्यालय, अमेरिका के विजिटिंग प्रोफेसर रहे।
वह कंडिशन मॉनिटरिंग सोसाइटी ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष हैं और एकोस्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के निर्वाचित उपाध्यक्ष है, वह भारतीय संयत्र इंजीनियरी संस्थान, भारत एकोस्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियर्स और एकोस्टिकल फाउंडेशन के अध्येता हैं।
वे अनेक राष्ट्रीय निकायों के सदस्य हैं जिनमें वन और पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की सदस्यता, जवाहरलाल नेहरु प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय शिक्षा परिषद की सदस्यता और आंध्र विश्वविद्यालय शैक्षणिक परिषद की सदस्यता शामिल है। |