| डीएसएल में कोर समूह वाली लगभग 15 डीआरडीओ प्रयोगशालाएं हैं जो विविध क्षेत्रों में कार्य संपन्न करती हैं । 1982 में यह प्रयोगशाला मेटकॉफ हाउस स्थित एक नई तकनीकी इमारत में स्थानांतरित कर दी गई तथा इसका नाम बदलकर रक्षा विज्ञान केंद्र रख दिया गया । रक्षा विज्ञान केंद्र ने अत्यधिक विशिष्ट और अनुप्रयोगान्मुख क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास गतिविधियां करने पर ध्यान केंद्रित किया । इन गतिविधियों में तरल ईंधन टेक्नोलॉजी, किरण-विश्लेषी, क्रिस्टलोग्राफी, सिस्टम इंजीनियरिंग, बायो-टेक्नोलॉजी इत्यादि सम्मिलित हैं । रक्षा विज्ञान केंद्र को एक नया उत्तरदायित्व भी सौंपा गया जिसमें लेजर पर विशेष जोर दिया गया । 1986 में रक्षा विज्ञान केंद्र को उसके प्रमुख मिशन के रूप में रक्षा अनुप्रयोगों के लिए अत्यधिक शक्ति वाले लेजर का विकास करने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। चूंकि यह लेजर और उससे संबंधित क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, इसलिए रक्षा विज्ञान केंद्र ने 01 अगस्त 1999 को पहली बार ‘‘लेजर साइंस एवं टेक्नोलॉजी सेंटर’’ के रूप में अपनी पहचान बनाई ।
स्वप्न
लेजर और ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उत्कृष्टता का केन्द्र बनना ।
मिशन
रक्षा सेवाओं के लिए निर्देशित ऊर्जा हथियार प्रणाली का विकास और सुपुर्दगी । इसके अतिरिक्त लेजर, फोटोनिक्स व ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आधुनिक अनुसंधान करना ।
|