1979 में डॉ. अनिल कुमार ने डीआरडीओ के देहरादून स्थित ‘‘डील’’ संगठन में वैज्ञानिक ‘सी’ श्रेणी के पद से कार्य करना आरंभ किया । यहां इन्होंने माइक्रो-स्ट्रिप्स व माइक्रोस्ट्रिप-एंटीना पर कार्य किया । इसके बाद 1981 में ये दिल्ली स्थित लेसटेक चले गए जिसे पहले रक्षा विज्ञान केंद्र के नाम से जाना जाता था । यहां इन्होंने फाइबर ऑप्टिक गाइरोस्कोप अर्थात एफओजी पर काम किया । एफओजी पर कार्य करने के बाद इन्होंने रिंग लेजर गाइरोस्कोप की डिजाइन तैयार की और उसे विकसित किया जिसमें पृथ्वी और तेजस के लिए आरएलजी भी शामिल थीं । इसी बीच 1990 में इन्होंने सीमा सुरक्षा बल के लिए घुसपैठिया चेतावनी लेजर अलार्म प्रणाली को भी विकसित किया ।
वर्ष 2001-02 की अवधी में डीआरडीओ ने इन्हें विदेश मंत्रालय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के निदेशक पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया ।
डॉ. अनिल कुमार ओएसए, आईएलए, आईईई सहित कई व्यावसायिक निकायों के सदस्य हैं तथा 37 वर्ष की आयु से ही ये आईईटीई के अध्येता रहे हैं। ये बहुत सी समितियों के भी सदस्य हैं और प्रतिनिधिमण्डलों के सदस्य के रूप में वे अमरीका और इज़राईल जैसे देशों में भी जा चुके हैं । अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में इनके कई अनुसंधान लेख प्रकाशित किए गए हैं । इनकी अभिरुची का वर्तमान विषय ‘हाई पावर लेजर व लेजर मेटीरियल’ है । |