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१९८३ में वर्ष का र.अं.वि.सं. वैज्ञानिक पुरस्कार - श्री एम. सत्यनारायण, वै. 'ई'
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१९८५ में वर्ष का र.अं.वि.सं. वैज्ञानिक और १९८७ में वर्ष का विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार -डॉ. रफीज हृदयनाथ, निदेशक, यं.अ.वि.सं.
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१९९५ में वर्ष का र.अं.वि.सं. वैज्ञानिक पुरस्कार - डॉ. ओम प्रकाश निझावन, निदेशक, यं.अं.वि.सं.
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१९९६ में र.अं.वि.सं. प्रौद्योगिकी पुरस्कार - श्री ज.अ.रा. कृष्णा मूर्ति, वै. 'जी', निदेशक, यं.अं.वि.सं. एवं उनकी २७ सदस्य वैज्ञानिक टीम को
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१९९८ में आत्म-निर्भरता में श्रेष्ठता के लिए अग्नि पुरस्कार - श्री ज.अ.रा. कृष्णा मूर्ति, वै. 'जी',
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२००२ में वर्ष का र.अं.वि.सं. वैज्ञानिक पुरस्कार-श्री एस. शिवारमन, सह निदेशक, यं.अं.वि.सं.
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२००१ में वर्ष का र.अं.वि.सं. युवा वैज्ञानिक पुरस्कार - श्री राजीव मराठे, वै. 'डी'
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र.अं.वि.सं. रक्षा प्रौद्योगिकी स्पिन-ऑफ पुरस्कार, २००० - प्लास्टिक एसफैरिक मैग्निफायर के विकास के लिए यं.अं.वि.सं. व इसके औद्योगिक साझेदार मै. ऑप्टिक्स एंड एलाइड इंजि. प्रा. लि., बैंगलोर को संयुक्त रूप से माननीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, ११ मई २००१ को प्रदान किया गया।
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राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी पुरस्कार- यं.अं.वि.सं. को अंध अपंगता के लिए प्लास्टिक एसफैरिक मैग्निफायर के विकास के लिए
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- र.अं.वि.सं. नगद पुरस्कार - डा. आर. एन. सिंह, वै. 'जी', श्री ज.अ.रा. कृष्णा मूर्ति, वै. 'जी', एवं श्री एस. शिवारमन, वै. 'एफ'
- र.अं.वि.सं. नगद पुरस्कार - श्री बी. वी. राव वै. 'एफ' एवं उनकी टीम को
- १३ फरवरी २००४ को र.अं.वि.सं. सर्वश्रेष्ठ कार्य पुरस्कार - श्री जी.एस. रावत तकनीकी अधिकारी 'सी'
- १७ मई २००५ को वर्ष २००३ का र.अं.वि.सं.वैज्ञानिक पुरस्कार-श्री इकबाल सिंह,सह निदेशक, यं.अं.वि.सं.
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