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अगले दशक के संक्रामक रोगों का पता लगाना और उनके लिए उपचारक रणनीतीयों के संबंध में कार्यशाला |
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21 जून 2003 को "अगले दशक के संक्रामक रोगों का पता लगाना और उनके लिए उपचारक रणनीतीयां" के संबंध में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। डीआरडीओ के जीवन विज्ञान प्रयोगशालाओं के सभी निदेशकों ने विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं स्थापनाओं एवं अन्य संस्थानों से पचास प्रतिनिधियों से भी अधिक लोगों के साथ इस कार्यशाला में भाग लिया। डॉ. आर.वी. स्वामी, सीसीआर एंड डी(एमएलएस) ने कार्यशाला का उद् घाटन किया। डॉ. डब्ल्यू सेल्वामूर्ती, सलाहकार जैवचिकित्सा विज्ञान ने उद् घाटन समारोह की अध्यक्षता की। मेजर जनरल टी.रविंदरनाथन ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया जबकि डॉ. आर.के शर्मा, संगठन सचिव ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। संक्रामक रोगों का समय से पता लगाना और उनकी रोकथाम के लिए रणनीतियां विकसित करने का समापन किया गया। |
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| "स्वदेशी दंत प्रत्योरपण प्रणाली" पर संगोष्ठी सह-कार्यशाला |
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"स्वदेशी दंत प्रत्योरपण प्रणाली" पर संगोष्ठी सह-कार्यशाला का आयोजन 1 फरवरी 2003 को किया गया। लेफ्टि. जनरल जे.एल शर्मा, ए.वी.एस.एम, वी.एस.एम महानिदेशक दंत सेवा, सेना मुख्यालय इसमें मुख्य अतिथि थे। पद्मश्री डॉ. आर के बाली, अध्यक्ष भारतीय दंत परिषद ने समारोह की अध्यक्षता की। डॉ. डब्ल्यू. सेल्वमूर्ति, सलाहकार जैव चिकित्सा विज्ञान सम्मानीय अतिथि थे। कार्यशाला के दौरान ले. जनरल जे. एल. शर्मा, ए.वी.एस.एम, वीएसएमपीडीपी द्वारा शल्यचिकित्सा किट, दंत प्रत्यारोपण, सर्जन का ब्राउजर और रोगी नयाचार जारी किया गया। ले. कर्नल एस के भंडारी ने शल्य चिकित्सा और प्रत्यारोपण की सर्जिकल तकनीक का सीधा प्रक्षेपण किया गया। सर्जरी के दौरान 16 वर्षीय पुरुष रोगी के 12, 13 दंत क्षेत्रों में दो बाहरी हेक्स प्रत्यारोपित किए गए। सर्जिकल किटों सहित दंत प्रत्यारोपण किटों को निदानशाला की जांच और विकास के लिए सशस्त्र सेवा के दंत स्थापना, अध्यक्ष भारतीय दंत परिषद, परिषद मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज को सौंपी गई।
उपर्युक्त विषय पर कार्यशाला का आयोजन निम्नलिखित स्थानों पर भी किया गया. जेएसएस दंत चिकित्सा कॉलेज मैसूर, 3 मार्च, 03, रामकृष्णा दंत चिकित्सा कॉलेज, कोयम्बटूर, 5 मार्च 03, राज मुथिया दंत चिकित्सा कॉलेज, अन्नामलाई, 6 मार्च, 03, रागस दंत चिकित्सा कॉलेज, चेन्नई, 7 मार्च 03 सुभारती दंत चिकित्सा कॉलेज मेरठ, 1 जून 2003। |
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| "भारतीय जैव चिकित्सा, वैज्ञानिक संघ" का 24वां वार्षिक सम्मलेन (आईएबीएमएस-2003) |
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भारतीय नामिकीय औषधि और संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) दिल्ली ने 2-4 नवंबर 2003 को भारतीय जैव चिकित्सा वैज्ञानिक संघ का 24वां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन का विषय "रेडियोट्रेसर इन ड्रग डेवलपमेंट" (औषधि विकास में रेडियोट्रेसर) था। सम्मेलन से एक दिन पहले 1 नवंबर 2003 को डॉ. शारदासुब्रैमन्यम मेमोरियल कार्यशाला हुई जिसमें भागीदारों को अनुसंधान और निदानशास्त्र में रेडियोट्रेसर की भूमिका के संबंध में संक्षिप्त रुप से बता दिया गया। उद् घाटन समारोह एलएएसटीईसी आडिटोरियम, दिल्ली में आयोजित किया गया और समारोह का उद् घाटन डॉ. वी.एस. राममूर्ति, सचिव डीएसटी ने किया, ले. जनरल टी.रविंदरनाथ, निदेशक, इनमास द्वारा किया गया तथा संगठन समिति के अध्यक्ष, आईएबीएमएस-2003 ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। सम्मानीय अतिथि, डॉ. पी.के. बनर्जी, निदेशक, डीआईपीएएस और डॉ. एस.पी त्यागराजन, मद्रास विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस अवसर पर प्रतिनिधियों को संबोधित किया। डॉ. एस.पी. त्यागराजन द्वारा स्मारिका का विमोचन किया गया और मुख्य अतिथि डॉ. वी.एस. राममूर्ति ने आईएबीएमएस-2003 के पुरस्कार और इनामों को वितरित किया। डॉ. ए.के सिंह, संगठन सचिव आईएबीएमएस-2003 ने धन्यवाद का प्रस्ताव पेश किया।
लगभग 300 प्रतिनिधियों ने इस चार दिवसीय बौद्धिक समारोह में भाग लिया जिनमें पूरे भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक/शिक्षाविद् तथा छात्र शामिल थे। सम्मेलन मुख्यतः रेडियोट्रेसेस और औषधि विकास पर केंद्रित रहा।
श्री आश्वनी कुमार, भारत के औषधि महानियंत्रक की अध्यक्षता में पेनल चर्चा के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। भेषज उद्योग, शिक्षा अनुसंधान, नामिकीय औषधि और विनियामक प्राधिकरण के प्रतिनिधियों ने औषधि विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। औषधि विकास में रेडियोट्रेसों के प्रयोग में विनियामक पहलुओं को शामिल करने के लिए एक समिति गठित की गई। |
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समुद्री बकथॉर्न पर संगोष्ठी |
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| 'समुद्री बकर्थान-पर्यावरण, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था का एक संसाधन' पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन 12 से 13 मार्च 2004 के दौरान इनमास द्वारा किया गया। डॉ. डब्ल्यू सेल्वामूर्ति, मुख्य नियंत्रक, अनुसंधान और विकास (एलएस एंड एसआर) तथा डीआरडीओ के प्रमुख वैज्ञानिक ने इस समारोह की अध्यक्षता की जबकि डॉ. तेज प्रताप, हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश के कुलपति इसके मुख्य अतिथि थे। विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं तथा अन्य संस्थानों से लगभग 120 प्रतिनिधियों ने संगोष्ठी में भाग लिया। ले. जनरल टी. रविंद्ररनाथ, एवीएसएम, वीएसएम, निदेशक इनमास ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए समुद्री बकर्थान के महत्व पर जोर दिया और इस जड़ी बूटी उत्पाद के अनुसंधान और विकास में विभिन्न डीआरडीओ एजेन्सियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के संबंध में बताया। डॉ. के. एस मान्जा, निदेशक, जीवन विज्ञान निदेशालय ने उद् घाटन सत्र के दौरान संगोष्ठी के विषय पर कहा तथा डॉ. पी.के बनर्जी, निदेशक डीआईपीएएस, ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। |
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| "चिकित्सा में जैवप्रौद्योगिकी" पर भारत - ट्यूनीशिया की कार्यशाला |
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चिकित्सा में जैवप्रौद्योगिकी पर भारत-ट्यूनीशिया की एक कार्यशाला इनमास में 28-29 जून, 2004 को विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यशाला को अनुसंधान और प्रौद्योगिकी की राज्य सचिवालय, उच्च शिक्षा मंत्रालय, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी, ट्यूनीशीय द्वारा सह-प्रायोजित किया गया और नामिकीय औषधि तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान (इनमास) दिल्ली और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग ग्वालियर द्वारा आयोजित किया गया। इस कार्यशाला के प्रतिभागियों (लगभग 75) में भारत ट्यूनीशिया वैज्ञानिक सहयोग कार्यक्रम की रुपरेखा के अंतर्गत भारत आने वाले ट्यूनीशिया के पांच प्रख्यात वैज्ञानिकों का शिष्ट मंडल, भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों, संस्थानों और सरकारी एजेन्सियों के वैज्ञानिक, शिक्षाशास्त्री, प्रौद्योगिकी प्रबंधक व्यावसायी और छात्र शामिल थे।
उद् घाटन सत्र ट्यूनीसिया जनतंत्र के राजदूत, महामहिम एम. इलियस कासरी और भारतीय आयोजकों, जिनमें डॉ. डब्ल्यू सेल्वामूर्ति, मख्य नियंत्रक, डीआरडीओ, ले. जनरल टी. रबिंद्रनाथ, निदेशक, इनमास दिल्ली और डॉ. वाई.पी. कुमार, सलाहकार, अंतर्राष्ट्रीय एसएंडटी सहयोग, डीएसटी, नई दिल्ली शामिल थे, की उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रमुख अभिभाषण प्रो. समीर के. ब्रह्मचारी, इंस्टिट्यूट ऑफ जेनोमिक्स एंड इंटेग्रेटिव वायालोजी (आईजीआईबी), दिल्ली द्वारा दिया गया, जिन्होंने जोरदार रुप से विचार प्रस्तुत किए कि जीनोम श्रृंखला परियोजनाओं में नए साधन और सूचना ने किस प्रकार नई औषधियों और चिकित्साओं के विकास में परिदृश्य को बदल दिया है। उन्होंने नई मोलेकुलर औषधि के विकास में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित करते हुए औषधियों में प्रमुख बदलाव अर्थात् उपचारात्मक और रोकथाम वाली औषधियों से भविष्यसूचक औषधियों में परिवर्तन पर चर्चा भी की।
कार्यशाला का प्रयोजन चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं में जैव प्रौद्योगिकी का विकास और वर्तमान स्थिति का जायजा लेना था। संक्रामक और असंक्रामक रोगों जैसे बैक्टीरिया और परपोषी जन्य संक्रमणों, आनुवांशिकीय समस्याओं और केंसर संबंधी और प्रतिरोधक भेषजीयों सहित जैवप्रौद्योगिकी और चिकित्सा विषयों पर कार्यशाला के दौरान चर्चा की गई। जैव प्रौद्योगिकी के मूलभूत और अनुप्रयुक्त पहलुओं से संबंधित प्रौद्योगिकी प्रबंधकीय मुद्दों पर भी एक सत्र संपन्न हुआ। इन्हें प्रो. के. डेलगी की अध्यक्षता वाले ट्यूनीसिया के शिष्टमंडल, जिसमें प्रो. एजेडाइन ट्रिकी, प्रो. समीर जौवा, प्रो. लोत्फी चोचेन और डॉ. सोनिया अबंडलहक शामिल थे, द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त, भारत के जेएनयू, एम्स, आईसीजीईबी, सीसीएमबी इत्यादि के प्रख्यात और प्रसिद्ध वैज्ञानिक भी इस पर बोले।
वी. मुत्थुस्वामी, वरिष्ठ उप महाप्रबंधक, आईसीएमआर, नई दिल्ली की अध्यक्षता में पेनल चर्चा के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। दोनों देशों में जैव प्रौद्योगिकी में और अधिक अनुसंधान और विकास के अनेक पहलुओं जिसमें जैव प्रौद्योगिकी में भारत-ट्यूनिशिया सहयोग की साझेदारी और अनुवर्ती कार्यवाही की रुपरेखा भी शामिल थी, पर चर्चा केंद्रित रही।
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| "किसी व्यक्ति के मनो-शारीरिक अनुकूलन के आंकलन और पूर्वानुमान के लिए कंप्यूटर सहायता प्राप्त पद्धतियां" पर भारतीय रूसी कार्यशाला |
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| इस तरह की कार्यशाला का आयोजन इनमास, दिल्ली द्वारा 9 नवंबर 2005 को किया गया। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रयोजित की गई थी और डॉ. डब्ल्यू सेल्वामूर्ति, सीसीआर एंड डी (एसएच एंड डी आर), डीआरडीओ मुख्यालय द्वारा उद् घाटित की गई थी। इनमास के निदेशक डॉ. आर.पी त्रिपाठी ने स्वागत भाषण दिया। डीआरडीओ, एम्स, राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला और सिविल एवं सैनिक अस्पतालों जैसे वैज्ञानिक और अनुसंधान संगठनों से कुल 70 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला एक बड़ी उपलब्धि रही जिसमें रुसी वैज्ञानिकों ने सार्थक चर्चा करने के बाद तकनीकी प्रदर्शन दिया। |
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| "पीईटी रेडियोफार्माच्यूटिक्लस के विकास में हाल की प्रवृत्तियों" के संबंध में भारत-जर्मन कार्यशाला |
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नामिकीय औषधि तथा संबद्ध विज्ञान (इनमास) दिल्ली में 15-17 नवंबर, 2005 को दौरान "पीईटी रेडियोफार्माच्यूटिक्लस के विकास में हाल की प्रवृत्तियों" के संबंध में भारत -जर्मन प्रयोगशाला का आयोजन किया गया। सम्मलेन का उद् घाटन श्री एम. नटराज, आर.एम.के.एस ने किया। डॉ. डब्ल्यू सेल्वामूर्ति, सीसीआर एंड डी (एल एस एंड एचआर) और प्रो. डॉ. रिचार्ड पी बौम, नामिकीय औषधि विभाग पीईटी/सीसी केंद्र, जर्मनी के अध्यक्ष ने भारत और जर्मन सहयोग पर भारतीय और जर्मनी संभावनाओं पर बात की। प्रमुख वक्ताओं में ख्यातिप्राप्त जर्मन क्लीनिसियन्स और जैव चिकित्सा वैज्ञानिक जैसे प्रो. फ्रैंक रोश, प्रो. एच.जे. वेसरर, डॉ. माइकिल होफमैन, डॉ. थोमस बेयर, डॉ. नेजर वोर्टमैन थे जो कि प्रो. रिचर्ड पोल के नेतृत्वाधीन थे। प्रमुख अभिभाषण डॉ. (श्रीमती) ए. सेमुअल ने दिया।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नई दिल्ली, भारत और इंटरनेशनल ब्यूरो, डीएलआर, बोन्न, जर्मनी द्वारा समर्थित इस विशिष्ट कार्यक्रम में औषधि पर अनुप्रयोज्य पीईटी रेडियो फार्माच्यूटिक्लस के डिजाइन और विकास में होने वाली प्रगति और घोषणओं सहित रेडियोरसायन/ रेडियोफार्मेसी के क्षेत्र में जर्मनी और भारत की शक्ति और क्षमताओं की समीक्षा की गई। प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान और विकास कार्य में और रेडियोभेषजियों के उत्पादन लगे रेडियो रसायनविदों/रेडियोफार्मासिस्टों तथा नामिकीय औषधि व्यवसाइयों को एक मंच प्रदान करना था तथा उनके द्वारा प्रदान सूचना और अनुभव को बांटना एवं भावी कार्य योजना के लिए मामलों और प्राथमिकताओं को तय करना था।
प्रमुख विषय जो इसमें शामिल थे, वे भौतिकी में पीईटी/सीटी की वर्तमान स्थिति और हाल का विकास, साइक्लोट्रोन कैसे चलाएं और एफडीजी वितरण कैसे आयोजित करें, विकिरण नुकसान और पीईटी रेडियोफार्माच्यूटिक्लस के डोजीमीटर; न्यूरों क्षय रोगों और ट्यूमर बायोलॉजी के अंतर्जीव विशेषता के लिए पीईटी ड्रेसरों का विकास; पीईटी के लिए रेडियोन्यूक्लाइड जेनरेटर प्रणालियां पेप्टाइड रेडियो रसायन और इसके अनुप्रयोग; क्लीनिकीय प्रयोग के लिए नए पीईटी ट्रेसर; आदर्श पीईटी रेडियोफार्माच्यूटिक्ल विज्ञान से क्लीनिक्ल अनुप्रयोग; नए पीईटी रेडियोफार्मोच्यूटिक्ल के अनुसंधान और विकास में वीईटी पशु की भूमिका; मोलेकुलर चिकित्सा योजना (एमआरटीपी) के लिए पीईटी/सीटी बायोलोजिकल लक्ष्य मात्रा की अवधारणा में सुधार करना; नए पीईटी रेडियोफार्माच्यूटिक्लस क्लीनिकल अनुभव; लिम्फोमस की रेडियोन्यूक्लाइड चिकित्सा; आदर्श चिकित्सा औषधि और औषधि प्रापण प्रणाली विकसित करने में उद्योग की भूमिका और भावी अनुसंधान के वित्तपोषण में अवसर थे।
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आयोजित सीईपी पाठ्यक्रम (2004-2005) |
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टेलीऔषधि में नेटवर्किंग |
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'टेलीऔषधि में नेटवर्किंग’ पर 13-17 सितम्बर, 2004 के दौरान एक सीईपी पाठ्यक्रम आयोजित किया गया। पाठ्यक्रम का उद्घाटन ले. जनरल टी. रबिंद्रनाथ, एवीएसएम, वीएसएम, निदेशक, इनमास द्वारा किया गया। इनमास एवं अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं से 24 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया। शंकाय में इनमास और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) सूचना प्रौद्योगिकी विभाग जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रमुख वक्ता थे। डॉ. सुभाष खुशु पाठ्यक्रम निदेशक थे। |
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जैवसांख्यिकी |
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'जैवसांख्यिकी’ पर सीईपी 1-5 नवंबर, 2004 के दौरान आयोजित किया गया। पाठ्यक्रम का उद् घाटन डॉ. आरएम. पांडे चिकित्सा साख्यिकी अनुसंधान संस्थान (आईआरएमएस) दिल्ली के निदेशक द्वारा किया गया। इस पाठ्यक्रम में इनमास एवं अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के 18 प्रतिभागियों ने भाग लिया। संकाय में इनमास तथा अन्य प्रसिद्ध संस्थानों जैसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान (आईएएसआरआई), दिल्ली विश्वविद्यालय इत्यादि के प्रमुख वक्ता शामिल थे। डॉ. पुष्पा मिश्रा, वैज्ञानिक ’डी’ पाठ्यक्रम निदेशक थी और सुश्री ममीती देवी वैज्ञानिक ’बी’ पाठ्यक्रम समन्वयक थी। |
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जड़ीबूटी औषधि अनुसंधान |
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"जड़ीबूटी औषधि" पर सीईपी इनमास में 3-7 अक्तूबर 2005 के दौरान आयोजित किया गया। विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं से 31 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया जिसमें 15 इनमास से और 16 अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के प्रतिभागी थे।
शंकाय में डीआईपीएएस, दिल्ली और इनमास दिल्ली से वैज्ञानिकों के अलावा विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यायों से प्रसिद्ध व्यावसायिक शामिल थे। एक पुस्तिका के रुप में व्यापक पाठ्यक्रम सामग्री संकलित की गई थी, जिसे बेहतर रुप से समझने के लिए पाठ्यक्रम के शुरु में दिया गया था।
इनमास के निदेशक डॉ. आरपी. त्रिपाठी ने सीईपी का उद््घाटन किया। रेडिएशन बायोलॉजी और स्वास्थ्य विज्ञान, बार्क, मुंबई के विभागाध्यक्ष डॉ. के. पी. मिश्रा ने ’मानव स्वास्थ्य और रोग के लिए जड़ी बूटियां, 21वीं सदी में परिदृश्य और चुनौतियां" पर प्रमुख अभिभाषण दिया। पाठ्यक्रम में 30 भाषण दिए गए जिसमें ’जड़ी बूटी औषधि अनुसंधान’ के विभिन्न पहलुओं पर 30 व्याख्यान शामिल थे। ये व्याख्यान बहुत सूचनाप्रद, ज्ञानवर्धक तथा सभी भागीदारों द्वारा सराहे गए। इस पाठ्यक्रम के निदेशक और उप निदेशक क्रमशः डॉ. राकेश कुमार शर्मा, वैज्ञानिक ’एफ’ और डॉ. राजेश अरोड़ा वैज्ञानिक ’डी’ थे।
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