डॉ. त्रिपाठी गत 24 वर्षों से विशेषकर सशस्त्र बलों के लिए और सामान्यतया पूरे मानवता के लिए विशिष्ट रोग स्थितियों अर्थात जन्मजात रोगों, अर्बुदशास्त्र और संक्रमण इमेजिंग और मनोसंज्ञान में नई तकनीकों के विकास और विद्यमान तथा नए सूत्रों के अनुप्रयोग पर केंद्रित रहते हुए अनाक्रमक इमेजिंग के क्षेत्र में आधारभूत तथा रोग विषयक अनुसंधान गतिविधि में सक्रिय रुप से कार्यरत रहें हैं।
उन्होंने नवंबर, 1986 में डीआरडीओ में सेवा आरंभ की और 16 जुलाई 1991 में स्थायी रुप से डीआरडीओ में रहे। उन्होंने अनेक अनुसंधान परियोजनाएं पूरी की हैं। राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पत्रिकाओं में उनके अनेक लेख प्रकाशित हुए और पुस्तकों में उनके मोनोग्राफ और अध्याय हैं। उन्होंने छात्रों को उनकी एम डी/एम एस और डी एम/पीएचडी थेसिस कार्य में दिशानिर्देश दिया। वह डी.एन.बी रेडियो निदान, एमएससी विकिरण विज्ञान और विकिरण औषधि (डीआरएम) पाठ्यक्रमों में डिप्लोमा के लिए अध्यापन करते हैं तथा विभिन्न विश्वविद्यालियों में एमडी/पीएचडी के परीक्षक हैं। उन्होंने विभिन्न सरकारी राष्ट्रीय चयन समितियों, बीआईएस, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, डीएसटी, आईसीएमआर, संघ लोक सेवा आयोग इत्यादि में विशेषज्ञ सदस्य के रुप में सेवा की है। वह विभिन्न राष्ट्रीय वैज्ञानिक निकायों के आजीवन सदस्य और कार्यकारी सदस्य हैं।
डॉ. आर.पी त्रिपाठी कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय- सैनफ्रांसिस्कों, मैलिंगक्रोड्टस इंस्टिट्यूट ऑफ रेडियोलोजी, सेंटलुइस, अमेरिका और जर्मन केंसर अनुसंधान संस्थान, हेडेलबर्ग, जर्मनी (1991 और 2002) में विश्वविद्यालय स्वास्थ्य संगठन के अध्येता रहे हैं, इंडियन कॉलेज ऑफ रेडियोलोजी एंड इमेजिंग (एफआईसीआरआई) के अध्येता और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी (एमएनएएसएस) के सदस्य रहे हैं। उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए "सेना अध्यक्ष का प्रशास्ति पत्र" डॉ. पन्नालाल वाष्णेय स्मारक व्याख्यान और डॉ. के.एम. राय स्मारक व्याख्यान और स्वर्ण पदक, 1998 सहित अनेक अध्येतावृत्तियों और सम्मानों से नवाजा गया है। |