| (a) आदेश
लद्दाख के ठंडे और उच्च अक्षांश वाले क्षेत्र में कृषि-पशु क्रियाओं पर प्रयुक्त शोध एवं विस्तार को जारी रखना, साथ ही बताए फलों की उपलब्धता को बढ़ाने पर एक दृष्टि जैसे हमारी सेनाओं की टुकड़ियों को स्थानीय किसानों द्वारा सब्जियों, फलों, दूध, मांस, अंडे व औषधियां एवं सुगंधित पौधों की उपलब्धता।
लद्दाख की हरियाली एवं पौधा जैव विविधता संरक्षण
टुकड़ियों को बेहतर गुणवत्ता के खाद्यानों को प्रदान करना एवं सड़क जाम के दौरान चंडीगढ़ से लेह के बीच वायु यातायात शुल्क में बचत (हवाई मार्ग द्वारा 27 रू. प्रति किग्रा)
हमारी टुकड़ियों के मनोबल को बढ़ाना, लद्दाख के किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना।
(b) कर्तव्यों की सूची
एफआरएल की मूल क्षमता को ध्यान रखते हुए यानि "ठंडे सूखे कृषि - पशु तकनीकों का विकास (सीएएएटी) और कथित मिशन की प्राप्ति" एफआरएल के कर्त्तव्यों की सूची है:-
एफआरएल में वैज्ञानिकों का मूल समूह न केवल कृषि पशु उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रत्यक्ष शोध एवं विकास द्वारा सीएसटी को विकसित करेगा बल्कि विश्व में समान स्तर के प्रयोगशालाओं/संस्थानों को वैज्ञानिकों के बीच संपर्क की स्थापना के द्वारा संयोजन के रूप में कार्य करेगा।
एक स्तर पर कृषि-पशु उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आक्रामक शोध एवं विकास के द्वारा विशेष निवेश को विकसित करना, जो हमारी सैन्य टुकड़ियों को न केवल 100 प्रतिशत ताजे खाद्यान्न की उपलब्धता को बढ़ाएगा बल्कि लद्दाख को पर्यावरण-मित्र तरीके से पूरे वर्ष इन खाद्यानों में आत्मनिर्भर बनाएगा।
सामान्य व्यक्ति एवं खासकर सैन्य टुकड़ियों के प्रयोग के लिए औषधीय एवं सुगंधित पौधों की जांच एवं पहचान करना।
एफआरएल के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को सहायक कार्य वातावरण प्रदान करना और विश्व के सर्वाधिक कठिन क्षेत्र में असैनिक जनसंख्या के बीच वैज्ञानिक संस्कृति का प्रसार करना, जैसा कि एफआरएल रक्षा साथ ही साथ नागरिक जनसंख्या के लिए तकनीकों के प्रयोग के कठिन दोहरी भूमिका से लैस है।
एफआरएल की छवि में, एवं सीएएटी की उपयोगिता में वृद्धि करना, पेटेंट, हस्तांतरण एवं कृषि-पशु तकनीक प्रकाशित शोध आंकड़ों को बनाने के लिए प्रयत्न किया जाएगा एवं एफआरएल द्वारा विकसित उत्पादों को लोकप्रिय किया जाएगा।
(c) मिशन
लद्दाख में, विश्व का सर्वाधिक कठिन क्षेत्र, ठंडे, सूखे कृषि-पशु तकनीक में शोध एवं विकास पर केंद्रित, एफआरएल अनूठे निवेश को विकसित करेंगा। जो 400 प्रतिशत तक कृषि-पशु उत्पादकता को बढ़ाएगा। यह न केवल एक पारिस्थितिक मित्रवत् वातावरण को 10 वीं पंचवर्षीय योजना (2012) के अंत तक वर्तमान 40 प्रतिशत से 100 प्रतिशत पर बढ़ाकर हमारी टुकड़ियों के लिए ताजे खाद्यान की उपलब्धता में वृद्धि करेगा, बल्कि लद्दाख के ठंडे, सूखे कृषि-पशु तकनीक को वैश्विक आदर्श भी बनाएगा।
(d) दृष्टि
2012 तक क्षेत्र शोध प्रयोगशाला को ठंडे सूखे कृषि-पशुतकनीकमेंविश्वनेताकेरूपमेंस्थांतरितकरना। |