मुख्य पृष्ठ डी.आर.डी.ई ऐतिहासिक पृष्टभूमि
     
       
     
 

रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डी.आर.डी.ई.) की नींव वर्ष 1924 में उस समय पड़ी जब तत्कालीन ग्वालियर राज्य के महाराजा ने वन्य उत्पादों एवं खनिज स्रोतों की खोज हेतु प्रयोगशाला की स्थापना की। इस प्रयोगशाला का उदघाटन वर्ष 1947 में भारत के गवर्नर जनरल ने किया था। वर्ष 1966 तक इसे जीवाजी औद्योगिक प्रयोगशाला के नाम से जाना जाता था।

वर्ष 1973 में अनुसंधान गतिविधियों में विस्तार के कारण प्रयोगशाला ने रक्षामंत्रालय के अधीन कार्य प्रारंभ किया। तब इसकी रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना नाम से स्वतंत्र  इकाई के रूप में पहचान स्थापित हुयी जिसके कार्यक्षेत्र पृथक थे।

खतरनाक रासायनिक एवं जैविक अभिकर्ताओं से रक्षा के साथ-साथ संबद्ध विषवैज्ञानिक समस्याओं से संबंधित विषय पर शोध कार्य करना इस प्रयोगशाला का मुख्य कार्य क्षेत्र रहा है।

 
 
         
 
 
   
 
 
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