डॉ. आर.विजयराघवन,वैज्ञानिक "जी" ने दिनांक ०५/०३/२००७ को डी.आर.डी.ई. ग्वालियर के निदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया । वे रसायनों के सुरक्षा मूल्यांकन ,विषैले रसायनों की पहचान ,भौतिक व चिकित्सीय सुरक्षा एवं निर्विषीकरण, रोगाणुओं की तीव्र पहचान हेतु निदान किटों का विकास , मानवमल निस्तारण में जैव प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग विषाणुओं एवं जीवाणुओं की जाँच तथा निदान प्रक्रिया एवं किट का विकास, कीट वाहक नियंत्रण उपाय आदि विषयों पर अनुसंधान रत रहे हैं।
डॉ. विजयराघवन ने जिप्मर पांडिचेरी से वर्ष १९७६ में एम.एस.सी. ( चिकित्सीय भेषज विज्ञान ) उपाधि प्राप्त की एवं वर्ष १९९० में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से भेषज विज्ञान विषय में पी.एच.डी. उपाधि अर्जित की । वे वर्ष १९९१ से १९९३ तक पिट्सवर्ग विश्व विद्यालय ,अमेरिका में अनुसंधान अध्येता के रूप में कार्यरत रहे । वे विभिन्न व्यावसायिक समितियों के सदस्य हैं , जैसे- इंडियन फारमाकोलॉजिकल सोसायटी ,सोसायटी ऑफ टॉक्सीकोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया, न्यूरोसाइंस सोसायटी ऑफ इंडिया एवं कम्प्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया । उन्हें विष विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु डी.आर.डी.ओ. पुरस्कार से सम्मानित किया गया । इसके अलावा उन्हें आत्मनिर्भरता के लिये अग्नि पुरस्कार , सोसायटी ऑफ टॉक्सीकोलॉजी वार्षिक अधिवेशन अमेरिका में सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार एवं डी.आर.डी.ओ. प्रौद्योगिकी पुरस्कार भी प्राप्त हुये हैं।
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