| एवं योग्यता की जाँच में सक्षम था। समय के साथ - साथ मनोवैज्ञानिक प्रणाली ने और अधिक मान्यता प्राप्त की।
जब सुदूर पूर्वी क्षेत्र फौजी कार्रवाइयों का मुख्य क्षेत्र बन गया तो भारत की सेना में भी अपूर्व वृध्दि हुई थी। इसी दौरान फरवरी1943में प्रयोग के आधार पर मनोवैज्ञानिक तकनीकों की सहायता से अधिकारियों के चयन के लिए वॉर ऑफिस सलेक्शन बोर्ड (WOSB)देहरादून आ गया। सन्1948में इसकी उपयोगिता की जाँच के लिए भारत सरकार ने एकघोष समिति' नामक समिति को नियुक्त किया। इस समिति के प्रतिवेदन के आधार पर ही रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) के अंतर्गत 29 अगस्त, 1949 को मनोवैज्ञानिक अनुसंधान विंग की स्थापना की गई। कार्मिक चयन प्रणाली के संबंध में शोध, सेवा चयन बोर्डों में कार्मिकों के चयन हेतु उपकरणों का विकास, चयन परिणाम एवं संबंधित साँख्यिकी का रखरखाव एवं सेवा चयन बोर्डों पर प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए मूल्यांकनकर्ताओं को प्रशिक्षित करने में मनोवैज्ञानिक अनुसंधान विंग (PRW) की मुख्य भूमिका थी। 1962 में मनोवैज्ञानिक अनुसंधान विंग (PRW) के विषय क्षेत्र में विस्तार हुआ एवं यह मनोवैज्ञानिक अनुसंधान निदेशालय (DPR) के रूप में परिवर्तित हो गया एवं इसी वर्ष 24 सितम्बर, 1962 को अनुप्रयुक्त मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला (APL) को इसकी निम्नतर फार्मेशन के रूप में स्थापित किया गया। कोच्चि स्थित NPRU जिसकी स्थापना रक्षा विज्ञान प्रयोगशाला के अंतर्गत दिसम्बर, 1956 में हुई थी, को 1962 में अनुप्रयुक्त मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला (APL)
का ही एक अंग घोषित कर दिया गया। तत्पश्चात् 1963 में सैन्य दलों की युध्द कुशलता, अभिप्रेरणा, मनोबल आदि से संबंधित समस्याओं के अध्ययन के लिए एक विचारक समूह का गठन किया गया। 26 अगस्त, 1967 को अनुप्रयुक्त मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला (APL) एवं एन पी आर यू का विलय मनोवैज्ञानिक अनुसंधान निदेशालय (DPR) में कर दिया गया था फिर भी एन पी आर यू के कार्यों /र् कत्तव्यों को कोच्चि में ही जारी रखा गया। पुन: वर्ष1982में एन.पी.आर. यू. का विलय डी.आई.पी.आर. में कर दिया गया।
रक्षा मनोवैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान (डी आई पी आर)
सैन्य बलों में उच्च तकनीक की शस्त्र प्रणाली का आगमन एवं युध्द के बदलते परिदृश्य ने सैन्य बलों के कार्मिकों की क्रिया-प्रणाली को बदल दिया है। प्रतिदिन उभरते हुए नए-नए मुट्ठों से निपटने के लिए अपनी शोध क्रिया एवं प्रशिक्षण मापदंड के माध्यम से मनोवैज्ञानिक अनुसंधान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्षा मंत्रालय ने मनोविज्ञान के महत्व को भली प्रकार समझा है। जिसकी वजह से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अंतर्गत नईर् कत्तव्य सूची के साथ डी आई पी आर ने एक आत्मनिर्भर एवं स्व-लेखा विधि प्रयोगशाला के रूप में जन्म लिया। इस संस्थान ने सार्वजनिक क्षेत्रों के साथ-साथ अर्ध्द सैन्य बलों में कार्मिक चयन हेतु तथा अन्य संगठनात्मक व्यवहार संबंधी समस्याओं पर सहयोग की सीमा को विस्तृत किया।
सैन्य बलों में मनोवैज्ञानिक चयन प्रणाली के प्रारंभ से ही डी आई पी आर विभिन्न सेवा चयन बोर्डों और वायु सेना चयन बोर्डों में मनोवैज्ञानिकों के चयन के लिए विशेष संस्था के रूप में कार्य करता है। विभिन्न सेवा चयन बोर्डों तथा वायु सेना चयन बोर्डों के लिए मनोवैज्ञानिकों का चयन करना एवं उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करना भी डी आई पी आर कीर् कत्तव्य सूची में से एक है।
यह संस्थान अपने देश में एकमात्र मनोवैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान है जो सैन्य बलों को सही काम के लिए सही व्यक्ति के चयन हेतु तकनीकी एवं पेशेवर सहायता प्रदान करता है। यह संस्थान अपनी विशेषज्ञता का लाभ अर्घ सैनिक बलों एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों तक पहुँचाकर देश के विकास एवं मानव संसाधन को सुदृढ़ बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कत्तव्यों का घोषणापत्र |
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अधिकारियों के चयन,स्थानन एवं सैन्य बलों के जवानों की कार्य क्षमता को अधिक से अधिक श्रेष्ठ बनाते हुए उनका वर्गीकरण एवं बुध्दि अभिरूचि एवं व्यक्तित्व परीक्षणों की रचना एवं उनका मानकीकरण करने संबंधी समयस्याओं पर शोध करना।
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सेवा चयन केन्द्रों पर चयन संबंधी अपनार् कत्तव्य निभाने वाले मूल्यांकन कर्ताओं को तकनीकी प्रशिक्षण देना।
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चयन प्रणाली के साथ-साथ सेवा के दौरान प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन की निगरानी करते हुए उसका मूल्यांकन करना।
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वैचारिक मतभेद, अभिप्रेरणा,अभिवृत्ति,नेतृत्व व्यवहार,कार्य संतोष,मनोबल एवं अन्य संगठनात्मक व्यवहार संबंधी शोध,करना।,
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मानव-मशीन प्रणाली में मानवीय तथ्यों पर शोध करना औरमनोवैज्ञानिक सामंजस्य,कार्यक्षमता एवं कार्मिकों के जीवन-स्तर पर गहन पर्यावरणिक परिस्थितियों द्वारा पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन।
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विभिन्न रक्षा संगठनों में होने वाली कार्मिक नीति शोध पर विशेष दबाव के साथ मानव-शक्ति योजना पर शोध करना।
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दृष्टि
सैन्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में डी आई पी आर एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभरेगा।
लक्ष्य |
निम्न से संबंधित मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में अग्रणी स्थान प्राप्त करना:
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कार्मिक चयन एवं मूल्यांकनकर्ताओं को प्रशिक्षण।
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नेतृत्व प्रभावशीलता,अभिप्रेरणा, मनोबल एवं युध्द सक्षमता में बृध्दि।
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संज्ञानात्मक मनोविज्ञान से संबंध्द मानवीय कारक।
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मुख्य सक्षमता |
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मनोवैज्ञानिक परीक्षणों एवं तकनीकों के माध्यम से कार्मिक चयन।
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अभिप्रेरणा, मनोबल और नेतृत्व प्रभावशीलता में वृध्दि हेतु संगठनात्मक व्यवहार शोध।
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मूल्यांकनकर्ताओं को प्रशिक्षण।
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मानव-मशीन प्रणाली में मानवीय कारकों पर शोध करना।
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