उन्होंने 1983 में ग्यूलेप विश्वविद्यालय, कनाडा से मांस विज्ञान में स्नातकोत्तर और खाद्य विज्ञान में पीएचडी संपन्न की और भारत वापस आए। वापस आने पर उन्होंने सितंबर 1983 में सीएफटीआरआई, मैसूर में वैज्ञानिक 'सी' में शामिल हुए। उन्होंने अप्रैल 1985 में सीएफटीआरआई छोड़ दिया और वापस पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में खाधान्न तकनीक में वैज्ञानिक के रूप में योगदान किया, जहां से उन्होंने सितबंर 1993 में गुरू नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में खाद्य विज्ञान एवं तकनीक के एक नए विभाग की स्थापना के लिए प्रस्थान किया। वे खाद्य विज्ञान एवं तकनीक विभाग के प्रोफेसर के साथ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, खाद्य तकनीक (6 जून 1994 से 5 जून 1998 तक) के कार्यभार एवं डीन, प्रयुक्त विज्ञान संकाय (6 जून 1996 से 5 मई 1998 तक) डीएफआरएल, मैसूर में शामिल होने के दौरान तक बने रहे।
उन्हें 1986 एवं 1999 में अखिल भारतीय खाद्य संरक्षक संघ, नई दिल्ली द्वारा औद्योगिक महत्ता के लिए सर्वश्रेष्ठ शोध पेपर के लिए एन.एन. मोहन मेमोरियल पुरस्कार मिला और 1989 में एएफएसटी (आई), मैसूर द्वारा सर्वश्रेष्ठ शोध पेपर के लिए मैसर्स गार्डनर पुरस्कार प्राप्त हुआ। वह वर्ष 2001 में फैलो एसोसिएशन ऑफ फूड साइंटिस्टस एंड टेक्नोलॉजिस्ट्स (इंडिया) से पुरस्कृत हुए। वे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपने योगदान के लिए अखिल भारतीय खाद्यान्न प्रसंस्करण संघ द्वारा राष्ट्रपति के "विशेष पुरस्कार" 2002 से सम्मानित हुए। वह डीआरडीओ द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2003 के लिए प्रधानमंत्री द्वारा प्रदर्शन श्रेष्ठता पुरस्कार से समानित हुए। उन्होंने 2003-04 में हिंदी वैज्ञानिक पत्रिका "रक्षा खाद्यान्न विज्ञान पत्रिका" के प्रकाशित संस्करण के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। यह एक राष्ट्रीय पुरस्कार है जो भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा राजभाषा के माध्यम से मेधावी प्रकाशन के सम्मान के लिए दिया जाता है। उनके पास एक सौ पचास से अधिक प्रकाशन राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में है, छः पुस्तक समीक्षाएं, दो पुस्तक अध्याय, नमकीन खाद्यान्नों पर दो आलेख, एकेडमिक प्रेस, यूके द्वारा प्रकाशित खाद्यान्न विज्ञान, तकनीक एवं पोषण में विश्वकोष का सम्मान है। इसमें दो पुस्तक अध्यायों (i) जैम निर्माण तकनीक (ii) फल एवं सब्जी प्रसंस्करण में यौगिक ने हाल में योगदान किया है।
वह एएफएसटी (आई) मैसूर, साथ ही साथ, पंजाब एकेडमी ऑफ साइंस के आजीवन सदस्य है। वह एएफएसटी (आई), लुधियाना चैप्टर (1988-90) और चैप्टर (उत्तर) एएफएसटी (आई), मैसूर (1989-90) के उपाध्यक्ष, अध्यक्ष एएफएसटी (आई), अमृतसर चैप्टर (1998-2000) रहे। वह 2003 में एएफएसटी (आई) के निर्वाचित अध्यक्ष रहे। वह विभिन्न विश्वविद्यालयों/संस्थानों के प्रश्नपत्र चयनकर्त्ता/परीक्षक, शिक्षा बोर्ड के सदस्य परीक्षा संचालन के लिए रहे, साथ ही साथ एम.एससी एवं पीएचडी शोध का मूल्यांकन भी किया। उन्होंने ढेरों संख्या में स्नातकोत्तर एवं शोधरत उम्मीदवारों को निर्देशित किया और वर्तमान में 8 शोधरत उम्मीदवारों को निर्देशित कर रहे हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खाद्यान्न विज्ञान एवं तकनीक की संगोष्ठियों में भाग लिया; पत्र प्रस्तुत किए, पत्र आमंत्रित किए और विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता की। वह "खाद्य विज्ञान एवं तकनीक" पत्रिका के संपादकीय बोर्ड के सदस्य हैं, साथ ही साथ, "भारतीय खाद्यान्न उद्योग", एएफएसटी (आई), मैसूर एवं सीएसआईआर का प्रकाशन "नेचुरल प्रोडक्ट रेडियंस" के सलाहकार बोर्ड में भी हैं। वह भारतीय मानक ब्यूरों के एफएडीसी14 के "पेय एवं कार्बोनेटेड पेय खंडीय समिति" के अध्यक्ष हैं। वह खाद्य विज्ञान एवं तकनीक के विभिन्न राष्ट्रीय समितियों के सदस्य एवं विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं के निर्णयकर्त्ता भी हैं।
वह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना और जीएनडीयू, अमृतसर में खाद्यान्न एवं विज्ञान एवं तकनीक विभागों के विकास/स्थापना में उपयोगी रहे। उनके निर्देशन में विभिन्न संख्या में तकनीक जैसे स्व-समाविष्ट स्वताप व्यवस्था, संरचित फल, स्वस्थिर खाने के लिए तैयार मीट उत्पाद, नीरा संरक्षण, मीट गुणवत्ता जांच किट आदि विकसित हुए और खाने योग्य शोषित पाउच प्रसंस्कृत खाद्यान्न, मुलायम नारियल पानी सरंक्षण, शीत शुष्क फल रस, साथ ही साथ बाधा तकनीक, डीएफआरएल द्वारा विकसित फल संरक्षण को विभिन्न उद्यमियों को हस्तांतरित किए गए हैं।
| फोन: |
0821 - 2473783, 2472953, 2473290/129/277 (110, 157)
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| पता: |
निदेशक,
रक्षा खाद्यान्न शोध प्रयोगशाला,
सिद्धार्थ नगर,
मैसूर-570011,
कर्नाटक |
| ई-मेल: |
director@dfrl.drdo.in
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