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अनुवांशिक अभियंत्रण
रेंडम एमप्लिफाइड पोलीमोरफिक डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक
- बीन (Phaseolus vulgaris L.)
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99 समान बीन जर्मप्लाज़म का संयोजन, केंद्रीय हिमालय से एकत्रित, आरएपीडी चिन्हक द्वारा उनके अनुवांशिक गतिशीलता के लिए खोजा गया। दस ओलिगोन्यूक्लोटाइड प्राइमर 60 प्रारंभिक आवरणों में से चुने गए और 123 व्यापक उत्पादों को पैदा किया। इनमें से, दो एंपलीकॉन को सभी अधिकतम द्वारा शामिल किया गया, वहीं 112 बहुलकीय कम से कम दो जोड़ेवार तुलना में थे। |
| नौ अद्वितीय बैंड चिन्हित 0.32 केबी मेगावाट कम से 3.5 केवी तक ऊंचे थे और आठ अधिकतम में सीमित थे। प्रधान ओपीएफ-17 को सर्वाधिक शक्तिशाली और कुशल पाया गया क्योंकि कुल 17 बैंड को उत्पन्न किया जिनमें 15 बहुलकीय थे। |
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आरएपीडी चिन्हक आंकड़ों के सांख्यकीय विश्लेषण यह प्रकट करते हैं कि समानता सहकारी कारण 0.19 से 0.91 है। समूह विश्लेषण के विभिन्न समानता के स्तरों के साथ 12 मुख्य शाखाओं में 99 अधिकताओं के श्रेणीकरण को प्रकट किया। 12 में से तीन शाखाओं 2, 3 और 5 के पास केवल 1 अधिकता थी। शाखा एक तीन अधिकताओं से बनी थी। जकार्ड के समानता के गुणांक द्वारा सर्वाधिक भिन्न प्रकट हुआ था। इन अधिकताओं की शाखा पद्धति के बहुलकीय आंकड़ा अधिकताओं के उंचाई की सीधी |
| पंक्ति या बहुलकीय के साथ को अंतर्संबंध नहीं दिखाया। समानता गुणांक और विश्लेषण पर आधारित 49, 8, 22, 56 और 84 की अधिकताएं बहुत भिन्न पायी गई और इनका प्रयोग सामान्य बीन उत्पादन के लिए प्रजनन कार्यक्रम में वांछित चरित्र मिश्रण के लिए हो सकता है। |
- भिण्डी [(Abelmoschus esculentus (L.) Moench]
भिण्डी में आणविक स्तर पर अभी तक अध्ययन विभिन्नता बहुत कम हुए हैं। ज्ञात प्रकारों की उंगलियों के छाप के प्रयास एवं इसके अनुवांशिक परिवर्तनशीलता के लिए, भिण्डी में आरएपीडी विश्लेषण प्रारंभ हुआ। इन सब्जियों के पत्तों के पास उच्च-म्यूसिलेजिनस मात्रा थी जो अम्लीय पॉलीसेक्रेइड, ग्लैक्टूरॉनिक एवं ग्लुकूरोनिक अम्लों से तैयार लवणों के साथ संयोजित और डीएनए के निष्कर्षण के एक अच्छे व्याख्याकार हैं। एक विकल्प के रूप में डीएनए बीजों से निष्कर्षित हुआ है और सीटाइल ट्राइमेथाइल अमेनियम ब्रोमाइड (सीआईएबी) के उपयोग से बफर एवं उच्च नमक बफर मानकीकृत हुए हैं। कुल 60 प्राइमर जांचे गए हैं जिनमें से 21 ने बहुलकता दिखाया है। 1.5% एगेरोप जेल पर विश्लेषण किए गए बैंडों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर बहुलकता खोजे गए।
- मेथी (Trigonella foenum graecum L.)
मध्य हिमालय से एकत्रित मेथी आणविक उपकरणों का प्रयोग करते हुए अनुवांशकय विविधता के मूल्यांकन के लिए लक्षित थी। सीटीएबी विधि का प्रयोग कर जीनोमिक डीएनए अलग कर दिया गया। 100 ओपेरोन 10-mer रैंडम प्रधानता सांचे के रूप में मेथी का जीनोमिक डीएनए के विरूद्ध पीसीआर स्थितियों के मानकीकृत के बाद किया गया। 22 प्रधानता साफ एवं पर्याप्त बहुलकता उत्पन्न करने वालों का प्रयोग किया गया और 54 मेथी अधिकताओं के 54 आरएपीडी प्रोफाइल उत्पन्न किए गए।
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टमाटर [Lycopersicon esculentum (L.) Mill.]
रैंडम एमप्लिफाइड पोलीमोरिक डीएनए (आरएपीडी) तकनीक टमाटरों के 54 जीनोटाइप के बीच संबंध और अनुवांशिक परिवर्तनशीलता को मापने के लिए प्रयोग किया गया। युवा पत्तियों में से डीएनए निष्कर्षण को औपचारिकता के लिए मानकीकृत किया गया और सीटाइल ट्रीमिथाइल अमोनियम ब्रोमाइड विधि का प्रयोग कर डीएनए निष्कर्षित किया गया। सभी 54 जीनोटाइप का डीएनए अमोनियम एसीटेर विधि का प्रयोग कर परिशुद्ध किया गया। पराबैंगनी स्पेक्ट्रोमीटर का प्रयोग करते हुए सभी जीने टाइप के डीएनए का मात्राकरण कर दिया गया। प्रधान जांच एवं पीसीआर क्रियान्वित किया जा रहा है।
- प्रकार/संकर विकार
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प्रकार/संकर राष्ट्रीय स्तर पर जारी करने के लिए
25 से 28 मई 2003 को आणंद (गुजरात) में संपन्न सब्जी शोध के 21वें समूह बैठक (अखिल भारतीय सब्जी विकास कार्यक्रम) में जारी करने के लिए निम्नांकित सब्जी प्रकारों/संकर की अनुशंसा की गई। |
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शिमला मिर्च संकर-202 गहरा हरा फल, पूर्व परिपक्वता खुले खेत में 340 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और रक्षित स्थिति में 420 क्यू/एचए औसत फसल क्षमता के साथ, फ्यूजारियम सूखने के क्षेत्र विरोध धारक। |
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लहसुन प्रकार डीएआरएल-52औसत पौधे की ऊंचाई 72.20 सीएम परिपक्वता 210 दिन, कंद सफेद क्रीमी, 150 क्यू/एच की फसल के साथ औसत 20 गांठ। यह प्रकार अचार एवं सॉस बनाने में उययोगी है। |
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राज्य प्रकार जारी समिति द्वारा जारी संकर |
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देहरादून(उत्तरांचल) में 7 मार्च 2003 की संपन्न राज्य प्रकार जारी समिति की बैठक में निम्नलिखित सब्जियां जारी करने के लिए अनुशंसित की गई। |
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खीरा संकर डीएआरएल-101 औसत पौधा ऊंचाई 155-160 सेमी, पौधा अंगूर की बेल की भांति, थौड़े पत्रों समेत उच्च शाखा वाली, द्विलिंगी, फल हरा बेलनाकार, 50 दिनों में परिपक्वता, पाउडरनुमा फफूंद खेत शीत वहन के साथ खुले खेत में 396 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और 522 क्यू/एचए सुरक्षित स्थितियों में। |
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टमाटर संकर डीआरएएल-304 पौधा अर्ध-निर्धारित, ऊंचाई 70-75 सेमी, गोल-चपटा फल, मोटे फलाभित्ति के साथ पकने के बाद गहरा लाल, रोपाई के 75 दिनों के भीतर परिपक्वता, फसल क्षमता खुले खेत में 375 क्विंटल/हेक्टेयर और 800 क्विंटल/हेक्टेयर सुरक्षित स्थितियों में। |
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चिन्हित संकर |
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खीरा संकर डीएआरएल-102 पौधे की ऊंचाई 155-160 सेमी, अंगूर की बेल की भांति, पौधा चौड़े पत्ते समेत शाखा वाला, फूल बेलनाकार, परिपक्वता 55 दिनों के अंतर्गत पाउडरी, फफूंद का खुले खेत में विरोध, ठंड सहन करने के साथ औसत फसल खुले खेत में 415 क्विंटल प्रति हेक्टेयर एवं सुरक्षित परिस्थितियों में 665 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। 17.04.2003 को जीबीपीयू एएवंटी, पंतनगर में हुई एसवीटी बैठक में चिन्हित। |
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मटर डीएआरएल-401
यह किस्म एक ऑफमिडियम अवधि का है, पौधे बौने और प्रति फली 6-7 बीज समेत अधिक शाखाओं वाले/प्रकार में पाउडरी फफूंद के खेत विरोध की क्षमता। हरी फलियां 135.0 क्विंटल प्रति हेक्टेयर जबकि सूखे बीज की फसल 15.0 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पौष्टिक स्तर पर, हरा खाद्य योग्य फली ये 73.5% पानी, 7.0 ग्राम प्रोटीन, 0.9 ग्राम लवण, 9.0 ग्राम एसकार्बिक अम्ल प्रति 100 ग्राम ताजे भार समेत 23.8% टीएसएस। |
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जर्मप्लाजम की समृद्धि
मध्य हिमालय क्षेत्र से विभिन्न पौधों के प्रजातियों से 2958 की प्राप्ती एकत्रित की गई है। संग्रहित जर्मप्लाजम प्रयोगशाला में फसल वृद्धि कार्यक्रम में सम्मिलन के लिए आशाजनक रेखा की पहचान उत्पत्ति के अंतर्गत है।

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फसल उत्पादन
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औषधीय एव सुगंधित पौधे |
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टीओटी औषधीय उत्पाद |
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श्वेत दाग, चर्म रोग एवं दांत दर्द के लिए विभिन्न बहुऔषधीय उत्पादों के व्यापार का हस्तांतरण डीआरडीओ के टीओटी कार्यक्रम के अंतर्गत हुआ है (मैसर्स. एआईएमआईएल फार्मास्यूटिकल प्रा. लिमि., नई दिल्ली) |
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श्वेत दाग रोधी मलहम मौखिक खुराक सामाजिक कलंक जारी उपचारों की सीमा एवं निदान शास्त्र को निर्धारित करते हुए मलहम और मौखिक द्रव खुराक के रुप में लघु औषधीय रुपांतरण विकसित किया गया है। उत्पादन को श्वेतदाग (लोकेलिस्टा) के 100 मरीजों पर प्रभावित शरीर के अंगो के आधार पर, लिंगवार सुधार एंव रोग की आयु के आधार पर मूल्यांकित किया गया। अधिकतम सुधार छाती एवं कमर के नीचे पिछले हिस्से से प्रभावित मरीजों पर दर्ज किया गया जबकि लिंगवार सुधार 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं मे बेहतर था। रोग की कम आयु वाले मरीजों ने बेहतर सुधार दिखाया। |
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चर्मरोग-विरोधी मलहम
विभिन्न नैदानिक विशेषताओं एवं रोग की शीर्ष के साथ एक बहुऔषधीय चर्मरोग के उपचार या प्रकाशीय त्वचा शोध को रुपांतरित एवं 50 मरीजों पर प्रयोग किया गया। पर्यवेक्षण के अंतर्गत सभी मरीज 5 से 70 दिनों मे स्वस्थ्य हो गए, रोग की गंभीरता एवं सीमा के आधार पर। |
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दांत दर्द रोधी - औषधीय उपचार (Dardhar) दंत नसों में पीड़ा के कारण दांत दर्द की रोकथाम एवं उपचार के लिए एक बहुऔषधीय उपचार पिथौरागढ़ के जिला एवं सैन्य अस्पतालों मे नैदानिक कुशलता के लिए रूपांतरित एवं विकसित किया गया। दर्द से 5 से 15 मिनटों में छुटकारा देने के लिए चिकित्सा को पर्यवेक्षित किया गया। |
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नए औषधीय उत्पाद का रूपांतरण |
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ठंडे एवं धूप-ताम्रता क्रीम: |
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ठंडे एवं उंचे क्षेत्रों में प्रयोग के लिए एक ठंड एवं धूप-ताम्रता के लिए एक औषधीय उत्पाद को रूपांतरिक किया गया है जहां व्यक्ति कड़ाके की ठंड, उच्च वेग की हवा और पराबैंगनी विकिरणों की उच्च तीव्रता की समस्या का सामना करते हैं। इन अजैवकीय दबावों को परिणाम का संचयी प्रभाव त्वचा के रूखापन, झुर्रियों एवं दरारों की वृद्धि, शरीर के बाहरी हिस्सों पर काले धब्बे का निर्माण, खासकर हाथ और चेहरे पर होता है। बर्फ स्थिति को आगे सामान्य एवं पराबैंगनी प्रकाश के परावर्तन के कारण और बढ़ देता है।
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उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए एक ऐसे औषधीय क्रीम के निर्माण का प्रयास किया गया है जो ठंड और धूप ताम्रता से छुटकारा दिला सके। इसके निर्माण में पौधे पाठ्य सामग्री के आधार पर और ठंड एवं धूप-ताम्रता के विरूद्ध सुरक्षात्मक कार्यवाही की विशेषताओं की लोक क्रियाओं की जानकारी के आधार पर चयनित किए गए क्रीम एक लघु-अवयवों का उत्पाद है जिसमे ACS-1 से ACS-11 तक के रूप में कूटबद्ध है जिसमे 11 पौधों के तत्व लिए गए हैं। उत्पाद तीव्र एवं उपतीव्र चर्मविष, म्यूकस मेंबरेस बैचेनी जांच एवं त्वचा संवदेन जांच के लिए मूल्यांकित किया गया। उत्पादन ने 2000 मिलीग्राम/किग्राम शरीर भार के सीमित जांच खुराक की सीमा तक उपरोक्त जांच के लिए किसी जहरीले विलक्षण को नहीं दिखाया।
उत्पाद के प्रारंभिक नैदानिक कुशलता का मूल्यांकन 9000 फीट पर पदस्थापित 25 आईटीबीपी के जवानों और 10000 फीट की उंचाई पर मुखवा ग्राम (उत्तरकांशी) के 35 स्थानीय निवासियों के द्वारा किया गया। प्रतिपूष्टि की सूचना ने यह प्रकट किया कि 90 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने क्रीम को ठंड के कारण सूखेपन एवं दरारों के विरूद्ध प्रभावी पाया एवं 85 प्रतिशत के धूप-ताम्रता के विरूद्ध प्रभावी पाने की सूचना दी है। |
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औषधीय शहद
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फ्रकटोज (शहद शर्करा) में सूक्रोज के रूपांतरण द्वारा हृदय रक्षक, यकृत रक्षक CNS उत्तेजक एवं गले तथा मुंह की शून्यता के विरूद्ध रक्षात्मक बहुऔषधी शहद निर्मित किया गया है। उत्पाद विभिन्न स्तरों के मानकीकरण एवं गुणवत्ता मूल्यांकन के अंतर्गत है। |
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नमकीन औषधीय चाय |
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6 पौधों की प्रजातियों के सार से एक बहुऔषधीय नमकीन चाय को निर्मित किया गया है। लोक कथाओं की जानकारियों के अनुसार, इन पौधों के सार के पास विभिन्न औषधीय विशेषताएं है जैसे-ठंड से रक्षा, खांसी, पाचन गड़बड़ी, पेशाब रोग, आकर्ष विरोधी, कैंसर रोधी एवं कृमिनाशक उत्पाद विभिन्न स्तरों के मानकीकरण एवं गुणवत्ता नियंत्रण के अंतर्गत हैं। इस चाय में चीनी का सम्मलिन नहीं होता है इसलिए यह मधुमेह रोगियों द्वारा लिया जा सकता है। |
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हृदयामृत |
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आजकल हाइपरटेंशन व्यापक जनसमूह के लिए एक सामान्य बीमारी है। आधुनिक व्यक्ति के परिवर्तित खाद्य शैली एवं जीवन स्तर ने इस समस्या को एक निर्धारक स्तर तक बढ़ा दिया है। इसको ध्यान में रखते हुए प्रयोगशाला ने पहाड़ियों मे व्यापक रूप से उत्पन्न कीमती औषधीय पौधों से एक औषधीय पेय को तैयार किया है। इस पेय को हाइपरटेंशन, नश शमन एवं उर्जा प्रदाता, रिफ्रेशर एवं स्वास्थ्य टॉनिक से छुटकारा दिलाने में लाभकारी पाया गया है। |
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औषधीय स्वास्थ्य पेय |
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स्वास्थ्य पेय एलो वेरा जैल से एलो वेरा रस तैयार किया गया है। इसमें लिगनिन, सैपोनिस, एंथ्रोक्विनस, एकता एवं लघु सेक्राइड, आवश्यक एवं द्वितीयक अमीनो अम्ल, लवण, विटामिन एवं एंजाइम शामिल हैं।
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ऐलो जैल ताजी खेती की गई परिपक्व पत्तियों से प्राप्त की जाती है और इसके आवश्यक पौष्टिक तत्वों की रक्षा के लिए इसे स्थरीकृत किया जाता है। इसे 3 औषधीयों के तत्व से भरपूर संकेंद्रित शर्करा के साथ एक निश्चित मात्रा मे मिश्रित किया जाता है और तब पीने के लिए पानी के साथ घोला जाता है। बताए गए साहित्यों के मुताबिक एलो वेरा स्वास्थ्य पेय प्रदाह रोधी, कुशल संतुलित एंव उचित प्रतिरोधी व्यवस्था कार्य को बढ़ाने वाला और आंत रक्षक, रेखा उत्तक उपचार प्रक्रिया को उन्नत एवं तेज करने वाला, बैक्टीरिया एवं जीवाणु जैसे विदेसी आक्रमणकारियों के खाने के रक्षक कोशिका को बढ़ाने वाला, ट्यूमर को रक्त आपूर्ति रोकने वाला है। यह हृदय की गड़बड़ियों, श्वांस एवं हिमपात की समस्याओं के अतिरिक्त स्मृति वर्धक एवं क्षुधा वर्धक में भी उपयोगी है। |
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| पशु विज्ञान |
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पौष्टिक दूध के लिए डेयरी पशुओं के अनुकूल जर्म प्लाज्म
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बेहतर उत्पादन एवं लाभ के लिए स्थानीय किसानों एवं पूर्व सैनिकों को उंचे उत्पादक पशुओं एवं स्थानीय पशुओं के स्तरीकरण मे उंचे वंशावली वाले जर्मप्लाज्म (व्याही गाय, ओसर और जनन सांड) प्रदान करने के लिए संकर डेयरी पशुओं, हॉलस्टेन फ्रेसिएन रक्त स्तर 62.50% और साहीवाल रक्त स्तर 37.50 % के अनुकूल जर्मप्लाज्म व्यवस्थित किए जा रहे हैं। |
पहाड़ियों में पशुओं के उत्पादन एवं प्रजनन कुशलता को विकसित करने के क्रम में उत्पादन समस्या की उपस्थिति के बारे में चेतावनी को विकसित करने के लिए खनिज प्रोफाइलिंग अध्ययन एवं मिट्टी-पौधा-पशु संबंध क्रियान्वित किए जा रहे हैं। |
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| जर्मन अंगोरा खरगोश के लिए जर्मप्लाज्म केंद्र |
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डीएआरएल ने भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के द्वारा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के अंतर्गत जर्मन अंगोरा खरगोश का एक जर्मप्लाज्म केंद्र (जीपीसी) स्थापित किया है। मादा एवं प्रजनन रेखा को मादा में प्रजनन तनाव को घटाने के क्रम में प्रजनन रिकॉर्ड को व्यवस्थित किए जाने के कार्य किए जा रहे हैं।
पिथौरागढ़ जिले के एक सीमावर्ती क्षेत्र मुंश्यारी प्रखंड के 110 किसानों को कुलीन जर्मप्लाज्म प्रदान किए गए हैं। इस कार्यक्रम ने क्षेत्र में अंगोरा खरगोश के रखरखाव को आंदोलित किया है। क्षेत्र की जनता ने अंगोरा खरगोश की फर्मिंग के अनुकूल आर्थिक एवं जीविका को समझ लिया है, जैसा कि किसान प्रति व्यस्क खरगोश से 800-1000 ग्राम प्रतिवर्ष ऊन के अतिरिक्त 12-14 किट्स/मादा/वर्ष प्राप्त कर रहे हैं। किसान ऊन को शाल स्वेटर टोपी आदि की तैयारी के लिए प्रसंस्कृत कर रहे हैं जो बाजार में ऊंचे मूल्य प्राप्त करती है। इसके साथ ही, जर्मप्लाज्म को सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं को भी दिया गया है। |
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| भूरा स्तर के अंगोरा खरगोश |
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खरगोश का विकास भूरा स्तर के अंगोरा खरगोश (Soviet Chinchila x German Angora) को विकसित किया गया है और BC2 (F2 x German Angora) को उपलब्ध किया गया है और F1, BC1 और BC2 में फाइबर परिधि क्रमश: 15.3µ, 13.0µ और 13.61µ वहीं जर्मन अंगोरा के 12.60µ की तुलना में जबकि केश रक्षा प्रतिशतता को क्रमश: 3.01%, 1.66% और 1.23% लेकर में 1.14 % जर्मन अंगोरा खरगोश के रूप में है। संकर में प्रति खरगोश ऊन की फसल 700-800 ग्राम है। संकर अंगोरा खरगोश बेहतर जीवन काल प्रदर्शित करते हैं। इसके आगे संकर ऊन की फसल को बढ़ाने के लिए किया जाता है। |
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मध्य - हिमालय के लिए मत्स्य - पालन
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कैंटोनमेंट मछली पालन |
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पिथौरागढ़, राइवाला और जोशीमठ कैंटोनमेंट, जहां 1.8 हेक्टेयर मे तालाब हैं, सैनिकों के कल्याण के लिए विदेशी प्रजाति की मछलियों का पालन किया जा रहा है।
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| बहु-संवर्धी मछली उत्पादन
प्रयोगशाला द्वारा मिश्रित मछली संवर्धन के लिए तकनीक को विकसित एवं मानकीकृत किया जा रहा है। तीन प्रजातियां, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, एवं कॉमन कार्प, 30:30 के अनुपात में संवर्धित अनुकूल पाए गए हैं अधिकतम उत्पादन के लिए तालाब के सभी स्तरों में चारे के पदार्थों का उपयोग हो सके। प्रयोगशाला द्वारा अधिकतम मछली का उत्पादन 3500 से 4000 किग्रा/हेक्टेयर/वर्ष उत्पादन के इस व्यवस्ता के अंतर्गत हो चुका है।
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- सेना स्थानों के 8 माउंटेन डिविजन में क्रियान्वित कृषि-बागवानी
- सेना क्षेत्रों में खुले एवं सुरक्षित सब्जी कृषि की स्थापना।
- बल्ली का वृक्षारोपण और समुद्री झड़बेरी का क्रियान्वयन
- सुंदर पर्यावरण के लिए पुष्प कृषि की स्थापना।
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बेमौसम सब्जियों की खेती के लिए FRP एवं पॉली कार्बोनेट ग्रीनहाउस सुविधा निर्मित
- सद्-भावना कार्यक्रम
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8माउंटेन डिविजन एवं 8 मराठा एलआई द्वारा ग्रहण किया गया काचन एवं चानीगुंड गावों को प्रशिक्षण एवं फसल विभिन्नता एवं सब्जियों के बीजों को प्रदान कर सब्जियों की फसल की अनुकूलता। |
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- लेह HQ 14 कोर्प्स, सियाचीन बेस कैंप, करू (3 इंफैंट्री डिविजन), द्रास (56 Mtn Bde), फायर एंड फ्यूरी काम्पलैक्स, लेह, चुमातहेंग (70 Inf. Bde) खूमबतांग (8 Mtn Div)
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2005-6 के दौरान सैन्य टुकड़ियों के प्रयोग के लिए 16.5 क्यू पॉपकार्न, 6 पॉपकार्न मशीन, 6 सीलिंग मशीन और पॉली-बैंग प्रदान किया।
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| जतरोफा करकॉस - जैव ईंधन के उत्पादन के लिए एक पौधा |
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| जीवश्म ईंधनों के बढ़ते दाम, तेल संरक्षण का कम होना और कड़े नियम उत्सर्जन के निकास ने रणनीतिक उर्जा आत्म निर्भरता के लिए कम प्रदूषक एवं आसानी से उपलब्ध पुनर्नवीन योग्य ईंधन के साथ जीवाश्म ईंधन के विकल्प को पुनर्निर्धारित किया है। हाल के वर्षों में जैव ईंधन पर उर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप में बल दिया गया है। हाल में डीएआरएल ने निम्नांकित लक्ष्यों के साथ इस दिशा में पहल की है। |
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- जे. करकॉस का कुलीन सर्वोत्तम जर्मप्लाज्म का संग्रह (बीज/सीडलिंग)।
- सैन्य फार्म, सिकंदराबाद में मिट्टी सुधार।
- जे. कारकॉस की नर्सरी वृद्धि।
- पौधारोपण/कटाई का वृक्षारोपण।
- प्रत्यक्ष बीज बुआई।
- जतरोफा उत्पादन
- उंचे खेतों (SOPs) के लिए कृषि तकनीक
- तेल निकालना
- मैकेनिकल सार
- तेल निकास प्रक्रिया का उच्च सीमांकन
- पारीय-इस्ट्रीफिकेशन
- प्रक्रिया का उच्च सीमांकन
- उच्च वसा मात्रा (5% एफएफए तक) के लिए स्पोनिफिकेशन प्रक्रिया
- क्षेत्रस्तरीय पार- इस्ट्रीफिकेशन प्रक्रिया (5% एफएफए से परे)
- ASTM/ BIS मानकानुसार तेल का रासायनिक विश्लेषण
- डीजल ईंधन में तेल की जांच और विभिन्न मिश्रण % के साथ क्षेत्र अभ्यास
- भंडारण/आक्सीकरण अध्ययन
- कम ताप प्रयोग के लिए हिम विरोधी
- रक्षा वाहनों, जेनसेट आदि में जैव-डीजल का प्रयोग।
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