|
रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के अंतर्गत वर्ष 1958 में स्थापित
शस्त्र अनुसंधान व विकास संस्थान के पचास वर्ष पूरे होने वाले हैं।
हथियारों के निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना एआरडीई का
काम है। किरकी स्थित गोला-बारूद कारखाने के कैंपस में एआरडीई ने
आरंभिक रूप में कार्य करना शुरू किया, इसमें तत्कालीन तकनीकी विकास
संस्थान (शस्त्र) जबलपुर एवं तकनीकी विकास संस्थान (गोला-बारूद)
किरकी से लोगों को काम पर लगाया गया। बाद में एआरडीई को पुणे शहर
के बाहरी
इलाके में स्थापित किया गया। यहां पास में ही राष्ट्रीय रसायन
प्रयोगशाला भी है जो कि केंद्रीय वैज्ञानिक
एवं अनुसंधान संस्थान की बहुत बड़ी प्रयोगशाला है। यह ऐसी स्थना पर
स्थित है जहां आरएवंडी की कई प्रयोगशालाएं/प्रतिष्ठान हैं। यहां
गैर-रक्षा क्षेत्र में उच्च शैक्षिक संस्थान व तकनीकी विकास एवं
अनुसंधान संस्थान भी हैं।
एआरडीई के विकास का इतिहास जो कि 40 वर्ष से अधिक पुराना है, वह
हथियारों के निर्माण के क्षेत्र में "नो वाट" व "हम क्या जानें" से
"हम क्यों जाने" तक पहुंच गई है। एआरडीई के अंतर्गत शस्त्रों के
अनुसंधान, विकास, प्रोटोटाइप तैयार करना, टेस्ट मूल्यांकन, तकनीकी
गतिविधियों के आदान-प्रदान के साथ-साथ युद्ध में प्रयुक्त जटिल एवं
विविध वस्तुओं का निर्माण करना है।
इसमें सीमित स्तर पर पाइलट- प्लांट प्रोडक्शन भी शामिल हैं। |