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प्रोटोटाइप मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट 
 
प्रोटोटाइप मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट (पीएमयू) एआरडीई की एक मात्र सबसे बड़ी इंजीनियरिंग सर्विस ग्रुप है। यह वह स्थान है जहां डिजायनरों के रचनात्मक विचारों को वास्तविकता की परिधि में ढ़ाला जाता है। आधुनिक व सामान्य उद्देश्य से बना यह इंजीनियरिंग मैन्यूफैक्चरिंग कॉम्पलैक्स है जहां शस्त्र बनाने वाले परियोजनाओं के लिए शीघ्रता से प्रोटोटाइप, सब-सिस्टम, कम्पोनेंट व टेस्ट रिग तैयार किए जाते हैं।.  
   
पीएमयू पारंपरिक मशीनों से लेकर इलैक्ट्रिक डिस्चार्ज सॉनिंग मशीन, इलैक्ट्रिक डिस्चार्ज मशीन, वायर इलैक्ट्रिक डिस्चार्ज मशीन, फ्लो फार्मिंग मशीन तैयार करता है। डिस्चार्ज मशीन, फ्लो फार्मिंग मशीन तैयार करता है। इसके अलावा पीएमयू के पास स्पीड प्रीसीसन मशीन के औजार जैसे 5 एक्सिस सीएनसी मिलींग, सीएनसी टर्निंग, सीएनसी एनग्रेविंग बनाने की सुविधाएं हैं। नवीनतम तकनीकों से तालमेल बनाए रखने के लिए समय-समय पर इन जारी सुविधाओं को उन्नत किया जाता है। 
   
इसके अलावा पीएमयू में उत्कृष्ट माप/नाप पद्धति सुविधाएं हैं जिसमें तीन कंप्यूटरीकृत कोर्डिनेट मापक मशीन, लंबाई मापक मशीन, प्रोफाइल प्रोजेक्टर आदि शामिल हैं जो उत्पादित वस्तु की गुणवत्ता को सुनिश्चित करते हैं। 
   
पर्यावरण जांच सुविधाएं 
 
सेवा में लगाए जाने से पहले सभी शस्त्र स्टोर्स को कई प्राकृतिक परिस्थितियों से गुजारा जाता है। जहां तक भारतीय उप-महाद्वीप की बात है तो इन शस्त्रों को अधिकतम तापमान, आर्दता व ऊंचाई वाले स्थानों पर कुशलतापूर्वक काम करने के लिए लगाया जाता है। डिजाइन बनाते समय ही कठिन परिस्थितियों से उन्हें गुजारकर उनका प्रदर्शन सुनिश्चित कर लिया जाता है। जलवायु संबंधी जांच आईसेट-ए व आईसेट-बी के जरिए की जाती है। इसके अंतर्गत कम/अधिक तापमान 5 से लेकर 95% तक आर्दता व कम दबाव की परिस्थितियां शामिल हैं। परिवहन जांच और इसे किस प्रकार चलाया जाए के अंतर्गत, इसे जटिल एवं रैंडम वाइब्रेशन से गुजारा जाता है तथा 30,000 ‘g’ तक शोक टेस्ट लगाए जाते हैं। कम व अधिक तापमान व आर्दता के स्तर की जांच भी 'वाइब्रेशन टेस्ट' के अंतर्गत किए जाते हैं। ये सारी सुविधाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है व अन्य प्रयोगकर्ताओं के लिए भी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है। देश में विस्फोटकों से भी खतरनाक चीजों की जांच के लिए यहां अनोखी सुविधा उपलब्ध है जिसमें पर्यावरणीय जांच भी शामिल है।
 
यंत्रीकरण  
 
हथियार बनाने की तकनीक चूंकि काफी प्रायोगिक होती है इसीलिए इंस्ट्रूमेंटिड फायरिंग ट्रायल पर विमान की उड़ान के मूल्यांकन के दौरान काफी जोर दिया जाता है। कई वर्षों के प्रयास के बाद व्यापक स्तर पर यंत्रीकरण सुविधाएं संपूर्ण आयुध प्रोजेक्ट के सपोर्ट सर्विस के तौर पर उपलब्ध कराई गई हैं। जो सुविधाएं कराई गई हैं, वे हैं: छोटे हथियारों मोर्टार के ट्रांसिएंट मेजरमेंट, छोटे हथियारों में रीयल टाइम प्रेशर, मोटर्स,
रॉकेट, गन, प्रोजिक्टाइलों की वेलोसिटी की माप, गनों के डिजाइन व डिस्प्लेसमेंट स्टडी स्कैप एड कार्टिज, चमकीले गोला बारूद की प्रकाशमापी जांच, विलंब होने पर उपाय, वीडियो रिकॉर्डिंग ट्रायल, अल्ट्राहाइस्पीड फोटो इंस्ट्रामेंटेशन, 4 लाख पीपीएस तक हुई घटनाओं की रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक चालित कैमरे व 450 केवी फ्लैश एक्स-रे रेडियोग्राफी संभव हो पाते हैं। 
 
विस्फोटक बनाने वाला इंजीनियरिंग कॉम्लैक 
 
चूंकि इन विस्फोटकों को संभालने में काफी खतरा रहता है इसीलिए इन्हें 'एसटीईसी' द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार विशेष रूप से तैयार सुविधाओं के अंतर्गत इनका रखरखाव व प्रोसेस किया जाता है, डिजाइन ग्रुपों की जरूरत के अनुरूप यहां मैंगजीन, फाइलिंग, कॉस्टिंग, प्रीसीजन, एचई चार्जेज मशीन व ब्रेकडाउन एवं एसेंबली कक्ष बनाए गए।  
 
पाशान रेंजेज  
 
हथियारों में प्रयुक्त सभी औजारों को कठिन व लंबे टेस्ट व जांच से गुजारना जरूरी होता है। इसके बाद ही इसे सेना में प्रयोग के लिए अंतिम मंजूरी मिलती है। पाशान रेंज के हथियारों के ट्रायल के लिए 1000एम व 25एम एसए रेंज, 100एम वेलोसिटी ट्यूनेल, सैंड बट ट्यूनेल जो कि हाई कैलिबर गन के लिए प्रयोग में लाया जाएगा, 30एम पारा ड्रॉप टावर, लीनिंग टावर विमान के लिए, बाहर निकलने की सीट का अध्ययन व छोटे एचई चार्जेज की फायरिंग सुविधाएं उपलब्ध है। यह स्पष्ट है कि बड़े पैमाने पर फायरिंग ट्रायल पाशान रेंजों के लिए संभव नहीं है क्योंकि वह क्षेत्र जहां ट्रायल किए जाते है, वे किसी डोपोलिटन शहर में ही आते है। इसी को ध्यान में रखकर 'एआरडीई' रेंज के लिए दूसरे संस्थानों व सेनाओं पर निर्भर रहता है।
 
तकनीकी सूचना अनुसंधान केंद्र (टीआईआरसी)  
 

आयुध बनाने जैसे मल्टी डिसीप्लीनरी क्षेत्र में 'आरएंडडी' कार्य कराने के लिए सर्वप्रथम जरूरी चीज सुसज्जित टीआईआरसी का होना है। सूचना के क्षेत्र में इंजीनियरों व वैज्ञानिकों को संबंधित क्षेत्र की अद्यतन जानकारी होनी चाहिए जो अखबार, किताबों व रिपोर्टों से हासिल कर सकते है। सुसंगठित पुस्तकालय के न होने से विभिन्न विभागों से विचारों का आदान-प्रदान संभव नहीं है। सूचना की इस जरूरत को टीआईआरसी किताबों के अपने संग्रह, रिसर्च रिपोर्ट व भारतीय एवं विदेशी पत्रिकाओं तथा ग्रंथों से पूरा करता है। टीआईआरसी ने सीडी, एनसाइक्लोपिडिया ब्रिटानिया आदि का अच्छा संग्रह किया।

टीआईआरसी समसामयिक विषयों पर कई प्रकाशन भी चला रही है जो प्रतिदिन की क्लिपींग सेवा, मासिक सूची व सारांश बुलेटिन भी छापता है साथ ही समसामयिक पुस्तकें व पत्रिकाएं निकालता है। हमारे वैज्ञानिकों को उनकी रूचि की खबरों से तालुक्कात करवाना है। जरूरत पड़ने पर इंटरनेट की सेवा ली जाती है जिसे तकनीकी सूचना अनुसंधान केंद्र द्वारा उपलब्ध कराया जाता है।

टीआईआरसी समय-समय पर अपने संसाधनों का आधुनिकीकरण करवा रहा है जिससे सूचना तकनीक के क्षेत्र में हो रहे विकास से कदम से कदम मिलकर चला जा सके साथ ही पाठकों की सेवा के लिए केंद्र प्रयासरता है।  

 
सीएडीएएस  
 
एआरडीई ने एडवांस डिजाइन विश्लेषण व सिमुलेशन के लिए आधुनिक केंद्र का निर्माण किया है जिससे भविष्य में जटिल हथियारों के निर्माण एवं विकास की जरूरत को पूरा किया जा सके। केंद्र में आईआरआईएक्स, इंडी, इंडियों से लेकर 02 वर्कस्टेशन उपलब्ध है। कई एसजीआई 330 विजुअल के सोलिड मॉडलिंग के लिए इन्हें प्रयोग में लाया जा रहा है। फिलहाल I-DEAS की कई सीटों व एएनएसवाईएस/एलएस-डीवाईएनए भी यहां विश्लेषण के लिए उपलब्ध है।  
 
CAD/CAE टूल का प्रयोग कर स्टीटों की डिजाइन तैयार करना व विश्लेषण इस केंद्र का कार्य है। एक ही जगह मॉडल तैयार करने प्रतिकृति तैयार करने व विशिष्ट हथियारों के उपकरणों का सर्वोत्कृष्ट विकास करने का कार्य इस सेंटर द्वारा किया जाता है। इन टूलों की मदद से विशिष्ट वस्तुओं का निर्माण जो उच्च थर्मल लोडिंग व हाइस्टेन दर के लिए प्रयुक्त होता है किया जा सकता है। इस प्रक्रिया की सहायता से हथियारों का डिजाइन व विकास किया जाता है। 
   
मल्टी सीपीयू व यूनिक्स आधारित सर्वर से वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है जो कंप्यूटर से उच्च गणना कर सकेगा। कुछ अन्य ग्राफिक्स स्टेशन बनाए जा रहे है। एक त्वरित प्रोटोटाइप सिस्टम भी लगाया जा रहा है। इसका मूल मकसद न केवल विकास के समय को कम करना है बल्कि गुणवत्ता व विश्वसनीयता का विकास करना है।  
 
सीएनएस  
 

कंप्यूटर की सहायता से तकनीकी व प्रशासनिक कार्यों को कंप्यूटिंग व नेटवर्किंग सॉल्यूशन (सीएनएस) विभाग पूरा करता है। विभागों के साथ-साथ मैटेरियल मैनेजमेंट, टीआईआरसी, तकनीकी प्रबंधन केंद्र व ग्रुप डायरेक्टरों के लिए स्थानीय क्षेत्र में नेटवर्क बनाए गए है। एक ही छत के नीचे प्रशासनिक, स्टोर, मेटेरियल पुस्तकालय व वेब सर्विसेज स्थापित किए गए हैं। ORACLE8i पर वेतन, भत्ते, व्यक्तिगत जानकारी कंप्यूटर संबंधी जानकारी जुटाने के लिए डेटाबेस यहां लगाए गए हैं। इसके अलावा कई लोकल एरिया नेटवर्क भी स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें एसजीआई वर्कस्टेशन, एसजीआई 330 विजुअल वर्कस्टेशन से लेकर एमएस विन एनटी एसजीआई इंडी, इंडिगो व 02 हाई-एंड वर्कस्टेशन जो कि IRIX पर स्थापित होगा शामिल हैं।

कई जगहों पर लोकल नेटवर्क को एकीकृत कर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। नेटवर्क चेसिसि स्विच के साथ कॉम्पैक एमएल 570, चार सीपीयू, सर्वर लगाए जा रहे हैं। काफी लंबी दूरी से जोड़ने के लिए स्विच 36 Nos, UTP पोर्ट 100Mbps पर, 12 Nos फाइबर पोर्ट 100 Mbps पर, 9 जीबी Nos फाइबर पोर्ट 1जीबी पर और 4 Nos एलएक्स-फाइबर पोर्टस 100 Mbps पर तैयार करता है। नेटवर्क की सहायता से लेयर तीन, पोर्ट ट्रंकिंग, VLAN व प्रायोरिटाइजेशन का काम किया जाता है, यह नेटवर्क कुछ मीटरों की दूरी से लेकर 5 किमी तक 10 Mbps से लेकर 1000 Mbps की गति से जोड़ता है।.  

 
 
         
 
 
   
 
 
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