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01 जून 1962 को कर्नाटक के उत्तरी कनारा जिले के उपिनपट्टन ग्राम में जन्मे डॉ. केशव दत्तात्रेय नायक ने बंगलोर विश्वविद्यालय के विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से 1974 में इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई की डिग्री डिस्टिंकशन प्राप्त कर उत्तीर्ण की । इसके पश्चात् इन्होंने वर्ष 1981 में विद्युत अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी, मुबंई से माइक्रो- इलेक्ट्रॉनिक्स में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की । जून 1984 तक इन्होंने एसीआरई, आईआईटी, मुबंई में वरिष्ठ परियोजना इंजीनियर के पद पर कार्य किया । जून 1984 में ही इन्होंने ''डील'' देहरादून में वैज्ञानिक 'डी' श्रेणी के पद पर सेवा करनी प्रारंभ की और तब से ''डील'' में रहते हुए ग्रुप हैड (एमआईसी/सीएडी ग्रुप एवं वैज्ञानिक 'एफ' श्रेणी) के गरिमामय पद तक पहुंचे । |
एमआईसी, मिलिमीटर तरंग कलपुर्जे के विकास में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही । मई 1999 में डॉ. नायक का बगलौर स्थित 'अनुराग प्रकोष्ठ' में स्थानांतरण कर दिया गया । 01 जुलाई 2001 से इन्हें वैज्ञानिक 'जी' श्रेणी पर पदोन्नत कर दिया गया जहां इन्होंने 02 जुलाई 2001 से 'अनुराग' के निदेशक का पदभार संभाला
डॉ. नायक को निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान किए गए हैं :
- आईजीएमडीपी 1989 में योगदान के लिए डीआरडीओ पुरस्कार ।
- वर्ष 1997-98 के लिए आइईटीई-आईआरएसआई (83) पुरस्कार जिसे रडार और माइक्रवेव प्रणाली के क्षेत्र में इनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिसंबर 1999 में प्रदान किया गया ।
- 11 मई 2000 को इन्हें राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम द्वारा प्रौद्योगिकी दिवस अन्वेषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
- डॉ. नायक आईईटीई के आजीवन फेलो, आईएमएपीएस तथा भारतीय एस्ट्रॉनॉटिकल सोसायटी के सदस्य हैं । इनके 25 से भी अधिक लेख प्रकाशित हुए हैं ।
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