डा. एसएम वीरभद्रप्पा, वैज्ञानिक 'एफ', को 01.02.2006 से प्रभावी, मानव संसाधन विकास (एचआरडी) का निदेशक नियुक्त किया गया। उन्होनें मैसूर विश्वविद्यालय से वर्ष 1976 में एमएससी (भू-विज्ञान) की उपाधि; जल विज्ञान में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और भू-रसायन में पीएचडी, दोनों आईआईटी, मुंबई से क्रमशः वर्ष 1977 और 1981 में की। उन्होंने अपना करियर वर्ष 1981 में भारत के भू-भौतिकी सर्वेक्षण, महाराष्ट्र परिमंडल (पश्चिम), इस्पात और खान मंत्रालय, पूणे में से भू-वैज्ञानिक के रूप में शुरू किया। इसके बाद, उन्हें वर्ष 1982 में प्रतिरक्षा भू-भाग अनुसंधान प्रयोगशाला (डीटीआरएल), दिल्ली में वैज्ञानिक 'सी' के रूप में भर्ती किया गया और वहां वर्ष 1993 तक सेवा की। उन्होंने भू-भाग मूल्यांकन और मानचित्रों में परंपरागत एवं दूर संवेदी तकनीकियों के माध्यम से सैन्य प्रयोगकर्त्ता जरूरतों पर कार्य किया। इनका अनुसंधान कार्य राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं मे प्रयोगकर्त्ता रिपोर्टों एवं प्रकाशनों के रूप में प्रकाशित हुए हैं।
वर्ष 1993 में, उनका स्थानांतरण डीआईपीएएस में कर दिया गया और वहां मई 2005 तक कार्य किया जहां उन्होंने वर्ष 1997-2005 के दौरान 48 प्रदर्शनियों और प्रस्तुतियों/वृत्तांतों में डीआरडीओ भागीदारी को समकक्ष बनाया, जिनमें 6 भारतीय विज्ञान कांग्रेस प्रदर्शनियां, 6 भारतीय अंतराष्ट्रीय व्यापार मेले, 4 गणतंत्र दिवस परेड (दिल्ली) तथा दो डीईएफईएक्सपीओ शामिल हैं।
वह आम जनता तक वैज्ञानिक सूचना विस्तारण तथा प्रतिरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के वैज्ञानिक एवं वैज्ञानिकी योगदान को मुद्रण तथा इलैक्ट्रानिक माध्यमों को मल्टीमीडिया, वीडियो फिल्मों तथा राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय प्रर्दशनियों में स्मारिकाओं के माध्यम से प्रचार सामग्री के प्रसार में सहायक हुए और उन्होंने डीआरडीओ के लिए कई अवार्ड जीते। उन्होंने कार्मिक सुरक्षा और दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ सी-टेक की संसाधन एकत्रीकरण स्कीम के लिए डीआईपीएएस, दिल्ली के आरडीआर के अंतर्गत संबंधी गतिविधियों को संभाला।
पीईएसीई के निदेशक के रूप में, वे प्रतिरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन तकनीकी ढांचा (डीआरटीसी) के अधीन 10,000 से अधिक कार्मिकों के आकलन एवं प्रशिक्षण के लिए जिम्मेदार हैं। उनके दिशानिर्देश के अंतर्गत केंद्र डीआरडीओ के प्रशासन, स्टोर और अन्य स्टाफ के प्रशिक्षण की देखभाल भी करता है।