डा. ए. सिवथानु पिल्लई,
सी सी आर & डी (एसीई & एनएस)
विशिष्ट वैज्ञानिक एवं मुख्य नियंत्रक, अनुसंधान एवं विकास, डीआरडीओ, रक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक, ब्रह्मोस एयरोस्पेस, नई दिल्ली
15 जुलाई 1947 में जन्मे, डा. पिल्लई ने वर्ष 1969 में मद्रास विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया, हार्वर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका में प्रबंधन विकास के कार्यक्रम में शामिल हुए (1991) और पूना विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की (1996)। डा. पिल्लई वर्ष 1969 में अंतरिक्ष विज्ञान एवं तकनीकी केंद्र, तिरुवंतपुरम से जुड़े और प्रक्षेपण वाहनों की
सिस्टम इंजीनियरिंग में कार्य किया। उन्होंने देश के लिए 10-वर्षीय अंतरिक्ष प्रारूप के विकास में डा. विक्रम साराभाई की सहायता की। वह डा. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में एसएलवी 3 (भारत का पहला उपग्रह प्रक्षेपण वाहन) की कोर टीम के सदस्य रहे हैं। एसएलवी3 में, डा. पिल्लई ने चार स्तरीय रॉकेट मोटरों और रॉकेट प्रणालियों के विकास में योगदान दिया था। एसएलवी3 प्रथम स्तर बाद में अग्नि मिसाइल का बूस्टर बना।
एसएलवी3 के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद, वह पीएसएलवी मिशन के विकास में पीएसएलवी अध्ययन समूह के सदस्य और एयरोस्पेस डायनेमिक्स एंड डिजाइन ग्रुप में वरिष्ठ वैज्ञानिक थे। बाद में, वह प्रक्षेपण वाहन कार्यक्रमों के लिए आईएसआरओ मुख्यालय, बंगलौर में प्रो. सतीश धवन, आईएसआरओ के चेयरमैन के तकनीकी सलाहकार बनें। उनका महत्वपूर्ण योगदान पीएसएलवी समरूपण के विकास और जीएसएलवी समरूपण तथा तकनीकी जरूरतों की दिशा में रहा है।
डा. पिल्लई वर्ष 1986 में डा. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में हैदराबाद स्थित एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुड़े। उन्होंने नवीनतम प्रबंधन प्रणाली का परिचय कराकर प्रमुख भूमिका निभाई और आईजीएमजीपी के कार्यक्रम निदेशक के रूप में अग्नि, पृथ्वी, नाग, त्रिशूल और आकाश मिसाइलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे डीआरडीएल के सहायक निदेशक भी थे। मिसाइल कार्यक्रम में उनका सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान सहयोगी दृष्टिकोण और तकनीकी अधिकृति द्वारा शैक्षणिक संस्थानों, आरएवंडी प्रयोगशालाओं और उद्योग नेटवर्क उपयोग करते हुए निर्णायक तकनीकी विकास में रहा। उन्होंने मिसाइल तकनीकों से स्पिन ऑफ्स जैसे कई सोसीटल उत्पादों का विकास भी किया। उन्हें वर्ष 1996 में नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ मुख्यालय पर मुख्य नियंत्रक (अनुसंधान एवं विकास), मिसाइल तकनीकों व उत्पादों, रेंज नेवल प्रणाली और विशेष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए जिम्मेदार, के रूप में नियुक्त किया गया। डा. पिल्लई सितंबर, 1999 से विशिष्ट वैज्ञानिक बन गए।
डा. पिल्लई ब्रह्मोस एयरोस्पेस के ब्रह्मोस-सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के डिजाइन, विकास, उत्पादन और विपणन के लिए जिम्मेदार मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंधन निदेशक भी हैं। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल फैमिली में सर्वश्रेष्ठ है। ब्रह्मोस पर डा. पिल्लई के नेतृत्व ने शानदार परिणाम उत्पन्न किए हैं। सफल परीक्षणों के बाद ब्रह्मोस प्रणाली को भारतीय नौसेना द्वारा उत्पादन के लिए स्वीकार कर ली गई।
डा. पिल्लई कई अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय जर्नल्स और सम्मेलनों में कई पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सत्रों की अध्यक्षता कर चुके हैं। "एनविजनिंग एन एंपॉवर्ड नेशन" शीर्षक की पुस्तक डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने लिखी है और इसके सह-लेखक डा. पिल्लई हैं। उन्होंने "टैक्नोलॉजी लीडरशिप- ए रिवोल्यूशन इन द मेकिंग" शीर्षक की पुस्तक भी प्रकाशित करा चुके हैं जिसमें भविष्यदृष्टा नेताओं के बारे में विवरण दिया गया है। हाल में, उन्होंने 'ओशन वारफेयर-द टैक्नोलॉजी वेव्स' शीर्षक की एक और पुस्तक प्रकाशित की है। वह डीआरडीओ साइंटिस्ट ऑफ द ईयर (1988), डा. विक्रम साराभाई रिसर्च अवार्ड (1991), वर्ष 2001 में तकनीकी एवं प्रबंधन विश्वविद्यालय, अमेरिका से परियोजना नेतृत्व के लिए डा. डेविडसन फ्रेम अवार्ड और वर्ष 2002 में भारत सरकार से पद्मश्री सहित कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।
जनवरी 2003 में, डा. पिल्लई को ओआईएससीए (आर्गनाइजेशन फॉर इंडस्ट्रीयल, स्प्रिच्युअल एंड कल्चरल एडवांसमेंट) इंटरनेशनल, जापान द्वारा समर्पित सेवाओं, सहयोग, विकास एवं शांति के अंतर्राष्ट्रीय ग्रह में असाधारण योगदान और उपलब्धि के लिए एक अवार्ड प्रदान किया गया। डा. पिल्लई और उनकी टीम को वर्ष 2005 में ब्रह्मोस के लिए "परफार्मेंस एक्सीलेंस अवार्ड ऑफ डीआरडीओ" प्राप्त हुआ। हाल में, उन्होंने द तमिलनाडु डा. एम.जी.आर. मेडिकल यूनीवर्सिटी एंड सत्यभामा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी डीम्ड यूनीवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ साइंस (होनोरिस कॉसा) की मानद डिग्री प्राप्त की है। वे इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग एंड एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के फैलो हैं। वह कई पेशेवर संस्थाओं- आईईईई, एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (एईएसआई), इंसट्रूमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ बिजनेस लीडर्स (अमेरिका) के सदस्य हैं। वह कई देशों में कई वैज्ञानिक तथा तकनीकी संगठनों का दौरा और विचार-विमर्श कर चुके हैं।.