डा. बीआर गंधे, वैज्ञानिक 'जी' डीआरडीओ मुख्यालय में पहली नवंबर 2005 को आयुध निदेशक नियुक्त किये गये। उन्होंने पूना विश्वविद्यालय से 1970 में भौतिक रसायन विज्ञान में प्रथम श्रेणी में एमएससी की उपाधि हासिल की और 1974 में रसायन शास्त्र में पीएचडी किया। अगस्त 1975 में वरिष्ठ वैज्ञानिक की हैसियत से वह डीआरडीओ से जुड़े और जून 1992 तक डीआरडीई, ग्वालियर में काम किया जहां उन्होंने जैव फास्फोरस और जैव गंधक के यौगिकों और मूलकों का पता लगाने की तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया। सितंबर 1985 से नवंबर 1986 तक उन्होंने हंगारी विज्ञान अकादमी, बूडापेस्ट, हंगरी में प्रतिनियुक्ति पर काम किया। जुलाई 1992 से अक्टूबर 2005 के बीच एचईएमआरएल, पूना में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने टारपीडो की नोदन प्रणाली के लिए उच्च ऊर्जा के ईंधन और आक्सीकारक, तोप नोदल के लिए कम भेद्यता के गोला-बारूद (एलोबीए), गैर जानलेवा धुएं के हथगोले और आयातित मिसाइलों सी नोदन इकाइयों के अवधि विस्तार संबंधी विकास कार्यों में अहम भूमिका निभायी। उन्होंने सफलतापूर्वक सीएल-20, जीएपी, बीयूएनईएनए और टीएन एजेड-जैसी संभावना संपन्न अति ऊर्जा की साग्रियों की प्रयोगशाला स्तरीय प्रक्रियाएं कीं। पीआईएनएकेए, एनएजी, 122 मिमी के विस्तारित परास के ग्रड राकेट और 120 मिमी, 125 मिमी टैंक तोप गोला-बारूद के लिए सीसीसी-जैसी एचईएमआरएल की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को क्यूए/क्यूसी कवरेज दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही है।
एचईएम आर एल में आईएसओ 9001:2000 आधरित गुणात्मक प्रबंधन प्रणाली लागू कराने में प्रबंधन प्रतिनिधि की हैसियत से उन्होंने महतवपूर्ण योगदान किया। वह पूना क्षेत्र की डीएटीई विश्लेषण कमेटी के चेयरमैन भी रहे हैं।
उन्हें 2004 में टारपीडो के लिए उच्च ऊर्जा के ईंधन के विकास के लिए डीआरडीओ प्रोद्योगिकी समूह सम्मान से सम्मानित किया गया। वह पूना विश्वविद्यालय के एमएससी और पीएचडी के मान्यताप्राप्त गाइड हैं और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय पत्रों में उन्होंने 50 से ज्यादा शोधपत्र प्रकाशित कराये हैं। वह हाई इनर्जी मटेरियल्स सोसायटी ऑफ इंडिया और पालीमर साइंस, इंडिया के आजीवन सदस्य हैं। |